फर्जी बैडमिंटन टूर्नामेंट रिपोर्ट मामला: दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, सोशल मीडिया से सामग्री हटाने के निर्देश

नई दिल्ली। कथित फर्जी बैडमिंटन टूर्नामेंट से जुड़ी वायरल रिपोर्ट मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला सोशल मीडिया पर प्रसारित उस दावे से जुड़ा है, जिसमें जजों और मंत्रियों के एक बैडमिंटन टूर्नामेंट में शामिल होने की बात कही गई थी।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया कि इस कथित फर्जी दावे से जुड़ी सभी वीडियो और सामग्री को हटाया जाए। साथ ही अदालत ने संबंधित सब्सक्राइबर्स की जानकारी उपलब्ध कराने के भी आदेश दिए हैं।

मामले में बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) ने अदालत में दलील दी कि स्पष्ट खंडन के बावजूद यह भ्रामक खबर लगातार ऑनलाइन फैल रही है, जिससे न्यायपालिका और खेल जगत की प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है।

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि वायरल दावा पूरी तरह फर्जी और भ्रामक है। उन्होंने कहा कि संबंधित व्यक्तियों ने किसी भी बैडमिंटन टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लिया था और इस मामले की फैक्ट-चेकिंग भी की जा चुकी है।

सरकारी पक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ तस्वीरों को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है और जिन लोगों का नाम इसमें जोड़ा गया है, वे उस समय आधिकारिक कार्यों के सिलसिले में विदेश यात्रा पर थे।

कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले में आदेश सुरक्षित रख लिया है और संकेत दिया है कि फर्जी सूचना फैलाने की प्रक्रिया की जांच और जिम्मेदारी तय करने पर आगे विचार किया जाएगा।

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