रायपुर | बलौदाबाजार हिंसा मामले में छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को अमित बघेल की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें जमानत दे दी। इसी मामले में सह-आरोपी अजय यादव और दिनेश वर्मा को भी जमानत प्रदान की गई है।
इससे पहले रायपुर में छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा खंडित होने के बाद कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े एक अन्य मामले में भी अमित बघेल को जमानत मिल चुकी थी। ऐसे में अब उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट में अमित बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी. बी. सुरेश और अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए तर्क दिया कि मामले के अन्य आरोपी लंबे समय से जेल में हैं, जबकि अमित बघेल की हिरासत अवधि अपेक्षाकृत कम रही है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने पहले उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल हिरासत की अवधि कम होना जमानत से इनकार करने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। अदालत ने इस आधार को स्वीकार नहीं किया और हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए जमानत मंजूर कर ली।
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि राज्य सरकार ने अमित बघेल को हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता बताया था, लेकिन इस आरोप के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए। साथ ही यह भी कहा गया कि मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और जांच से जुड़े सभी दस्तावेज रिकॉर्ड पर उपलब्ध हैं। ऐसे में आरोपी को अनिश्चितकाल तक न्यायिक हिरासत में रखना उचित नहीं है।
क्या है बलौदाबाजार हिंसा मामला?
10 जून 2024 को बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में एक सामाजिक मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान मंच से दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों के बाद भीड़ उग्र हो गई और कलेक्टोरेट तथा एसपी कार्यालय परिसर में घुसकर तोड़फोड़ और आगजनी की। घटना में कई सरकारी वाहनों और भवनों को नुकसान पहुंचा, जबकि ड्यूटी पर तैनात कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे।
इस मामले में पुलिस ने अमित बघेल, अजय यादव, दिनेश वर्मा सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया था। पहले हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने तीनों आरोपियों को जमानत दे दी है।