रायपुर । बीजापुर जिले में हानिकारक खरपतवार गाजरघास के उन्मूलन और इसके दुष्प्रभावों से बचाव के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के नेतृत्व में सात दिवसीय जागरूकता एवं उन्मूलन अभियान चलाया गया। 16 से 22 अगस्त तक आयोजित अभियान में विद्यार्थियों, किसानों और ग्रामीणों को गाजरघास से होने वाले नुकसान तथा इसके सुरक्षित नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी गई।
गाजरघास यानी पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस तेजी से फैलने वाला खरपतवार है, जो फसलों की उत्पादकता प्रभावित करने के साथ मिट्टी, पशुओं और मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर डाल सकता है। इसके संपर्क में आने से त्वचा संबंधी एलर्जी और सांस से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। बीजापुर जिले में इसके फैलाव से फसलों की पैदावार में 20 से 30 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना बताई गई है।
स्कूलों में विद्यार्थियों को किया जागरूक
अभियान के दौरान केंद्रीय विद्यालय बीजापुर, स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम स्कूल, शासकीय कन्या विद्यालय ज्ञानगुड़ी और पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय सहित विभिन्न स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। विद्यार्थियों को गाजरघास की पहचान, इससे होने वाले नुकसान और समय रहते इसके उन्मूलन की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को जागरूकता का संदेश परिवार और आसपास के लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया।
किसानों को बताए सुरक्षित उन्मूलन के तरीके
कोतापाल, मुसालूर, धनौरा, पापनपाल और दुगेली सहित ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और महिला कृषकों को गाजरघास नियंत्रण की वैज्ञानिक जानकारी दी गई। फूल आने से पहले दस्ताने और मास्क पहनकर गाजरघास को जड़ सहित निकालने की सुरक्षित विधि का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया।
किसानों को जैविक और रासायनिक नियंत्रण के उपायों के साथ गैर-कृषि भूमि में अनुशंसित शाकनाशियों के उपयोग की जानकारी दी गई। जैविक नियंत्रण के लिए मैक्सिकन बीटल के उपयोग के संबंध में भी बताया गया।
विद्यार्थियों और ग्रामीणों ने चलाया सफाई अभियान
सात दिवसीय अभियान में सैकड़ों विद्यार्थी, किसान और किसान मित्र शामिल हुए। उन्होंने सार्वजनिक स्थानों और खेतों से गाजरघास हटाकर स्वच्छता एवं सुरक्षित पर्यावरण का संदेश दिया।
कृषि विज्ञान केंद्र की इस पहल का उद्देश्य गाजरघास के फैलाव को रोकने के साथ किसानों और ग्रामीणों को इसके स्वास्थ्य एवं कृषि संबंधी दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना रहा। अभियान ने विद्यार्थियों, किसानों और ग्रामीणों को एकजुट करते हुए सुरक्षित कृषि, स्वस्थ पर्यावरण और बेहतर ग्रामीण स्वास्थ्य की दिशा में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया।