रायपुर|छत्तीसगढ़ के रेल अधोसंरचना विकास को नई गति मिलने जा रही है। भारतीय रेल ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत 755 करोड़ रुपये की लागत वाली चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति प्रदेशवासियों की ओर से आभार जताया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना छत्तीसगढ़ के विकास, औद्योगिक प्रगति और देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के प्रयासों से प्रदेश में रेल कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार हो रहा है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है।
चांपा-कोरबा रेल खंड साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली अहम कड़ी है। तीसरी रेल लाइन बनने से कोयला परिवहन की क्षमता बढ़ेगी और देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अतिरिक्त रेल लाइन बनने से यात्री सेवाओं में भी सुधार होगा। ट्रेनों की आवाजाही सुचारु होगी, परिचालन संबंधी बाधाएं कम होंगी और भविष्य में नई यात्री ट्रेनों के संचालन की संभावनाएं बढ़ेंगी।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल माल परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कोरबा, जांजगीर-चांपा सहित आसपास के क्षेत्रों में उद्योग, व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। बेहतर रेल संपर्क से रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना पर 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं पर काम चल रहा है। प्रदेश में नई रेल लाइन, दोहरीकरण और तीसरी-चौथी लाइन के विस्तार से कनेक्टिविटी मजबूत हो रही है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में जहां छत्तीसगढ़ की रेल परियोजनाओं के लिए करीब 300 करोड़ रुपये का बजट मिलता था, वहीं वर्ष 2026-27 में यह बढ़कर 7,470 करोड़ रुपये हो गया है। इसके साथ ही प्रदेश के 32 रेलवे स्टेशनों को अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 1,680 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के संकल्प को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।