कैलिफ़ोर्निया | अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया राज्य की मशहूर साल्टन सी (Salton Sea) अब पर्यावरणीय आपदा का प्रतीक बनती जा रही है। तेजी से सूख रही इस झील के तल से उठ रही जहरीली धूल स्थानीय लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि 21 मई 2026 को इंपीरियल वैली में आपात समीक्षा बैठक बुलाई गई, जिसमें “हजार्डस डस्ट मिटिगेशन” यानी जहरीली धूल को रोकने के उपायों पर चर्चा हुई।
वैज्ञानिकों के अनुसार, झील के सूखते तल से उठने वाली धूल में **आर्सेनिक, सेलेनियम और प्रतिबंधित कीटनाशकों** के कण पाए गए हैं। तेज हवाओं के दौरान यह जहरीली धूल आसपास के इलाकों में फैल रही है, जिससे अस्थमा, फेफड़ों की बीमारी और कैंसर का खतरा बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंपीरियल काउंटी में बच्चों में अस्थमा के मामले कैलिफ़ोर्निया में सबसे ज्यादा हैं।
कैसे बनी थी साल्टन सी?
साल्टन सी का जन्म 1905 में एक इंजीनियरिंग दुर्घटना के बाद हुआ था, जब कोलोराडो नदी की नहर टूटने से पानी एक सूखे बेसिन में भरता चला गया। शुरुआती दशकों में यह जगह पर्यटन और वाटर स्पोर्ट्स का बड़ा केंद्र बनी, लेकिन धीरे-धीरे खेतों से आने वाले रासायनिक अपशिष्ट और पानी के वाष्पीकरण ने इसे जहरीली झील में बदल दिया।
क्यों है भारत के लिए चेतावनी?
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि कैलिफ़ोर्निया का यह संकट भारत, खासकर लद्दाख, बेंगलुरु और अन्य जलस्रोतों के लिए गंभीर चेतावनी है। लद्दाख में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और जलस्रोत सिकुड़ रहे हैं। वहीं बेंगलुरु की झीलें प्रदूषण और अतिक्रमण की वजह से लगातार दम तोड़ रही हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते जल संरक्षण, झीलों की सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण पर गंभीर कदम नहीं उठाए गए, तो भारत में भी भविष्य में जहरीली धूल, पानी का संकट और बड़े स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकते हैं।
गरीब आबादी पर सबसे ज्यादा असर
रिपोर्ट्स बताती हैं कि साल्टन सी के आसपास रहने वाली कम आय वर्ग की आबादी इस संकट का सबसे ज्यादा शिकार हो रही है। पर्यावरणविद इसे “क्लाइमेट इंजस्टिस” का मामला बता रहे हैं, जहां पर्यावरणीय नुकसान का बोझ गरीब समुदायों पर अधिक पड़ता है।
क्या हो सकता है समाधान?
विशेषज्ञों ने झीलों और जलस्रोतों को बचाने के लिए वर्षा जल संचयन, स्थानीय जल निकायों की सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण को चुनावी मुद्दा बनाने जैसे कदमों पर जोर दिया है।
साल्टन सी का संकट अब सिर्फ अमेरिका की समस्या नहीं रहा, बल्कि पूरी दुनिया के लिए यह एक चेतावनी बन चुका है कि यदि जल और पर्यावरण संरक्षण को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आने वाले वर्षों में कई शहर और क्षेत्र रहने लायक नहीं बचेंगे।