PM आवास योजना में गड़बड़ी का आरोप, जनप्रतिनिधि और पटवारी की भूमिका पर उठे सवाल

सक्ती। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत आवासों को लेकर बाराद्वार नगर पंचायत में विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि शासकीय भूमि के रिकॉर्ड में कथित बदलाव कर 246 आवासों के लिए स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। मामले की शिकायत के बाद प्रशासन ने जांच टीम गठित कर दी है, जो जमीन से जुड़े दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों की जांच कर रही है।

जानकारी के अनुसार, नगर पंचायत बाराद्वार में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 288 आवासों की स्वीकृति के लिए दस्तावेज तैयार किए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इनमें से करीब 246 आवास आबादी और घास मद की जमीन पर प्रस्तावित हैं। आरोप है कि घास मद की भूमि को रिकॉर्ड में आबादी भूमि दर्शाकर आवास स्वीकृति के लिए दस्तावेज तैयार किए गए।

इस मामले में नगर पंचायत के नेता प्रतिपक्ष अभिषेक राय ने अधिकारियों से शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्व अभिलेखों में कथित हेरफेर कर शासकीय भूमि की स्थिति बदली गई। शिकायत के बाद जांच टीम दस्तावेजों और संबंधित रिकॉर्ड की जांच में जुट गई है।

वहीं नगर पंचायत अध्यक्ष नारायण कुर्रे के बयान के बाद मामला और गरमा गया है। उन्होंने कहा कि जिन जगहों पर वर्तमान में आवास बने हैं, वहां कई लोग लंबे समय से रह रहे हैं। उन्होंने पूर्व में हुई आबादी भूमि की खरीदी-बिक्री की जांच की मांग भी उठाई है।

मामले को लेकर अब यह सवाल उठ रहा है कि अगर शिकायत सामने नहीं आती तो क्या कथित रूप से गलत दस्तावेजों के आधार पर आवास स्वीकृत हो जाते। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है।

नगर पंचायत बाराद्वार के सीएमओ ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है और जांच प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि यह राजस्व विभाग से जुड़ा मामला है, इसलिए जिला स्तर पर गठित टीम जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिसके बाद ही मामले में वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

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