अग्रसेन जयंती की धूम, प्रतिभाओं का सम्मान कर दिया सामाजिक एकता का संदेश

तिल्दा-नेवरा। महाराजा अग्रसेन जयंती के अवसर पर तिल्दा-नेवरा में आस्था, उत्साह और सामाजिक एकजुटता का अनूठा संगम देखने को मिला। अग्रसेन धाम में आयोजित सम्मान समारोह में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा सहित विभिन्न समाजों के अध्यक्ष और गणमान्य नागरिक शामिल हुए। कार्यक्रम में महाराजा अग्रसेन के आदर्शों को याद करते हुए सामाजिक समरसता, सेवा और परोपकार का संदेश दिया गया।

शोभायात्रा से गूंजा नगर, अग्रसेन चौक पर पूजा-अर्चना

महाराजा अग्रसेन जयंती के उपलक्ष्य में अग्रवाल समाज की ओर से नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शोभायात्रा के अग्रसेन चौक पहुंचने पर महाराजा अग्रसेन की पूजा-अर्चना कर श्रद्धा व्यक्त की गई। पूरे आयोजन में सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान की झलक देखने को मिली।

प्रतिभाओं का सम्मान, समाज की उपलब्धियों को मिला मंच

शोभायात्रा के बाद नवीन अग्रसेन भवन में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा, मेहनत और सेवा भावना से विशिष्ट पहचान बनाने वाले समाज के प्रतिभाशाली व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। इस पहल के माध्यम से समाज की उपलब्धियों और उत्कृष्ट योगदान को प्रोत्साहित किया गया।

अग्रसेन जी के आदर्शों पर चलने का आह्वान

समारोह में उपस्थित अतिथियों ने कहा कि महाराजा अग्रसेन का जीवन सेवा, समरसता, करुणा और समानता की भावना का प्रतीक है। उनके विचार आज भी समाज को एकजुट होकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनें और आपसी सहयोग के साथ सामूहिक विकास को प्राथमिकता दें।

वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि महाराजा अग्रसेन के आदर्श केवल स्मरण करने तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उन्हें अपने जीवन और व्यवहार में भी अपनाना चाहिए। सेवा, सद्भाव, भाईचारे और परोपकार की भावना को मजबूत करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

सामाजिक एकता और प्रतिभा प्रोत्साहन का संदेश

महाराजा अग्रसेन जयंती पर आयोजित इस कार्यक्रम ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता, प्रतिभा प्रोत्साहन और जनसेवा के महत्व को रेखांकित किया। आयोजन के माध्यम से समाज को महाराजा अग्रसेन के आदर्शों पर चलते हुए समरस, सहयोगी और सशक्त समाज के निर्माण का संदेश दिया गया।

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