तेहरान । ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने अमेरिका की ओर से ईरान की सात शर्तों पर दी गई प्रतिक्रिया को ‘अपर्याप्त’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने कुछ शर्तों को स्वीकार किया है, लेकिन कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। रेजाई ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान की कूटनीतिक नीति बदल चुकी है और अब पहले जैसी स्थिति में लौटने का सवाल नहीं है।
सात शर्तों पर अमेरिका के जवाब से संतुष्ट नहीं तेहरान
ईरानी समाचार माध्यमों के अनुसार, रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अमेरिका ने ईरान की सात शर्तों में से कुछ को स्वीकार किया है, लेकिन उसकी प्रतिक्रिया को पर्याप्त नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि आगे की प्रक्रिया शुरू करने से पहले अमेरिका को अस्पष्ट मुद्दों पर अपना रुख स्पष्ट करना होगा।
रेजाई के मुताबिक, पिछले दो महीनों में अमेरिका ने पाकिस्तान, कतर और इराक सहित विभिन्न माध्यमों से ईरान तक प्रस्ताव पहुंचाए थे। इसके बाद तेहरान ने अपनी शर्तें रखीं, जिनके जवाब में वाशिंगटन ने अपनी प्रतिक्रिया भेजी।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सख्त रुख
ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसकी शर्तें पूरी होने तक होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और अमेरिका के साथ बातचीत आगे बढ़ाने पर सहमति नहीं बनेगी। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान पेश किए गए प्रस्ताव में शर्तें पूरी होने पर सात दिनों के भीतर इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर सामान्य आवाजाही बहाल करने की बात कही थी। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। युद्ध से पहले दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का परिवहन इसी मार्ग से होता था। ऐसे में यहां जारी तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
बातचीत से पीछे नहीं हटने का दावा
रेजाई ने कहा कि ईरान ने कूटनीति का रास्ता नहीं छोड़ा है, लेकिन अब वह पहले की तरह बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने पिछले दौर की वार्ताओं का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका ने पहले समझौते किए और बाद में उनसे पीछे हट गया।
ईरानी अधिकारी ने संकेत दिया कि भविष्य की बातचीत के लिए अमेरिका को अपनी प्रतिबद्धताओं और शर्तों पर स्पष्टता दिखानी होगी। हालांकि, अमेरिका की ओर से ईरान की सात शर्तों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
फिलहाल, ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक गतिरोध बना हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए दोनों पक्षों के बीच किसी ठोस सहमति का इंतजार है।