रायपुर | भारत सरकार ने ग्रामीण आजीविका और समग्र विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से ‘विकसित भारत-जी राम जी (VB-G RAM G) अधिनियम 2025’ अधिसूचित किया है। यह नया कानून 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू होगा और वर्तमान मनरेगा व्यवस्था का स्थान लेगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने भी इस नई रोजगार गारंटी व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अधिनियम को ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधार बताते हुए कहा कि विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में यह कानून महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि 125 दिनों की कानूनी रोजगार गारंटी ग्रामीण परिवारों के जीवन में आर्थिक स्थिरता और खुशहाली लेकर आएगी।
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार के इच्छुक वयस्क सदस्यों को अब प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों के अकुशल शारीरिक श्रम की वैधानिक गारंटी मिलेगी। यह वर्तमान 100 दिनों की सीमा से 25 प्रतिशत अधिक है। केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए योजना हेतु 95 हजार 692.31 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है, जबकि राज्यों के अंशदान सहित कुल परिव्यय 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगा।
योजना के अंतर्गत मजदूरी का भुगतान डीबीटी के माध्यम से सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में किया जाएगा। भुगतान साप्ताहिक आधार पर या मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा। भुगतान में देरी होने पर श्रमिकों को विलंब क्षतिपूर्ति का लाभ मिलेगा। वहीं तय समय के भीतर काम उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान किया गया है।
नई व्यवस्था में ग्राम पंचायतों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों के चयन में अधिक अधिकार दिए गए हैं। इससे जल संरक्षण, कृषि अधोसंरचना और ग्रामीण परिसंपत्तियों के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार ने मनरेगा से नई व्यवस्था में सुगम संक्रमण के लिए भी विशेष प्रावधान किए हैं। वर्तमान ई-केवाईसी सत्यापित जॉब कार्ड तब तक मान्य रहेंगे, जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते। 30 जून 2026 तक मनरेगा के अंतर्गत चल रहे सभी कार्य जारी रहेंगे और 1 जुलाई से स्वतः नई व्यवस्था में शामिल हो जाएंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार यह अधिनियम केवल रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और उत्पादक बनाने की व्यापक पहल है। छत्तीसगढ़ में इसके प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण अधोसंरचना, जल संरक्षण और कृषि सुधार को नई गति मिलने की उम्मीद है।