छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) ने राज्य में 301 पदों के लिए पटवारी चयन परीक्षा आयोजित की। परीक्षा में राज्य भर से आए दो लाख आवेदनों में 1.64 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी, जबकि 37,286 अनुपस्थित रहे।
परीक्षा में छत्तीसगढ़ की संस्कृति, इतिहास, राजनीति और शासकीय योजनाओं के जुड़े सवाल छात्रों को खूब पसंद आए। इसमें राज्य की वर्तमान योजनाओं में कौन-सी योजना न्याय योजना नहीं, राज्य में सामाजिक समरसता सम्मान अलंकरण का नाम, कला के क्षेत्र में पद्मश्री पाने वाले व्यक्ति का नाम, राज्य के द्वितीय विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष का नाम जैसे सवाल शामिल थे। वहीं फसलों के संबंध में छत्तीसगढ़ी भाषा में ओन्हारी का हिंदी अर्थ पूछा गया, गणित व विज्ञान से जुड़े अन्य सवालों से छात्रों को थोड़ा उलझाकर रखा।
परीक्षा देने आए विमल देवांगन, आकाश राजहंस, किरण सोनवानी, अरुण यादव, नेहा वर्मा, आंचल तिवारी व अन्य अभ्यर्थियों ने कहा कि माह भर पूर्व छत्तीसगढ़ लोकसेवा आयोग, व्यापमं की परीक्षा में जिस तरह से सवाल आ रहे थे, उन्हें देखकर लगा कि यह परीक्षा भी काफी कठिन होने वाली है। इस बार प्रश्नों का चयन काफी अच्छा रहा है। कई सवालों ने जरूर उलझनें बढ़ाईं, लेकिन जिन्होंने तैयारियां की है, उनके अंक काफी अच्छे आएंगे।
राज्य में बने 601 सेंटर, 37,286 अभ्यर्थी अनुपस्थित
व्यापमं से मिली जानकारी के अनुसार परीक्षा के लिए रायपुर में 38 सेंटर बनाए गए थे। परीक्षा में 10,732 अभ्यर्थी शामिल हुए, जबकि 3,943 अभ्यर्थी अनुपस्थित थे। वहीं प्रदेश भर में 601 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। इसमें 1.64 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए, जबकि 37,286 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे।
रायपुर में परीक्षा देने आए अभ्यर्थियों ने कहा
1. रिजनिंग के सवाल काफी सरल थे। शासन की योजनाओं से जुड़े सवाल आए। इतिहास को लेकर आप्शन चयन में असमंजस की स्थिति रही।
जयप्रकाश साहू, परीक्षार्थी, निवासी-सराईपाली
2. पटवारी की परीक्षा में पहले डाटा व आंकड़ों से जुड़े सवाल अधिक रहते थे। इस बार ऐसे सवाल ज्यादा नहीं आए। लगभग सारे सवाल सही बने हैं।
आकाश राजहंश, परीक्षार्थी, निवासी-रायपुर
3. परीक्षा में सवाल काफी अच्छे पूछे गए थे। प्रश्नों के तो जवाब हमने दिए हैं, लेकिन पहले से तैयारी करते तो और बेहतर होता।
अरुण यादव, परीक्षार्थी, निवासी- गोपालगंज, (बिहार)
4. सीजीपीएससी में जिस तरह से सवाल आए थे, लग रहा था कि पटवारी परीक्षा देना भी कठिन होगा, लेकिन यह पहले से सरल था।