साहसिक खेल बच्चों के भयमुक्त व्यक्तित्व का निर्माण करता है–रत्नेश पांडेय मप्र के पहले आधिकारिक पर्वतारोही ने बताया साहसिक खेलों का महत्व

सीसीएफ की 91 वी राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित,जांजगीर-चांपा जिले से अध्यक्ष नम्रता पटेल सहित सदस्य हुए शामिल

सक्ती-मप्र के पहले आधिकारिक पर्वतारोही रत्नेश पांडेय ने कहा है कि साहस का समग्र जीवन में बहुत बड़ा महत्व है।यह जीवन का ऐसा तत्व है जो व्यक्ति की प्रतिभा को सातत्य के साथ प्रकटीकरण सुनिश्चित करता है। माउंट एवरेस्ट पर जाकर पहली बार जनगणमन का उद्घोष करने वाले पांडेय ने आज चाइल्ड कंजर्वेशन फाउंडेशन की 91 वी ई सेमिनार को संबोधित करते हुए बताया कि एक बार माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए करीब 25 लाख की राशि व्यय होती है।दो माह की अवधि में अप्रैल मई के मौसम में वहां करीब माइनस 40 डिग्री का तापमान रहता है। सतना निवासी पांडेय प्रदेश के पहले पर्वतारोही है जिन्होंने दुनियां की सबसे ऊंची चोटी पर जाकर मप्र का नाम रोशन किया है।लगभग 29 हज़ार फिट की ऊंचाई पर इसे विजय पाना बेहद दुष्कर कार्य माना जाता है। अंदर के डर को भगाइये

सेमीनार को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति को चुनौती का सामना करने के लिए सबसे पहले अपने अंदर के उस भाव को शमित करना चाहिये जो आपको भयग्रस्त बनाता है,उन्होंने बताया कि जिस समय उन्होंने 2015 में पहली बार एवरेस्ट की चढ़ाई की तब नेपाल में भयंकर भूकम्प के चलते 23 हज़ार फिट से उन्हें नीचे आना पड़ा,2016 में उन्होंने फिर प्रयास किया और विजय पाई। इसलिए हमें सदैव उत्साह के साथ कठिन परिस्थितियों का सामना करना चाहिये। कभी हार न मानने का जज्बा ही अंतिम विजय का पथ प्रशस्त करता है

सफलता आपको सतर्क करती है-सफलता के बाद ध्येयनिष्ठ रहने के लिए सदैव सतर्कता से जीवन जीना चाहिये क्योंकि जीवन में स्थायित्व नही सातत्य होना चाहिये।छोटे बच्चों को हमें यह बताना ही चाहिए कि बड़ा काम करने के लिए बलिदान की भावना अनिवार्य हैं,समस्याएं हर व्यक्ति को घेरती है निराशा स्वाभाविक है लेकिन बच्चों को हमेशा सजग और उत्साह ही जीवन की वास्तविकता है।

मप्र के 75 दिव्यांग और 25 किन्नरों ने एवरेस्ट फतह की,पर्वतारोहण या जीवन की उड़ान बुलंद हौंसले से जीती जा सकती है।अक्सर नकारात्मक भाव हमें जकड़ते है तब हमें बच्चों को इसके लिए मानसिक रूप से तैयार करना चाहिए कि यह भाव जीवन का स्थाई नही बल्कि क्षणिक है। इसी मनोविज्ञान के साथ मप्र के 25 किन्नरों एवं ,75 दिव्यांग बच्चों ने एवरेस्ट की चोटियों तक सफलतापूर्वक अपने बुलंद हौंसलो के ध्वज गाड़े हैं

पर्वतारोहण का मतलब कठिन कुछ भी नही- पांडेय ने बताया कि एवरेस्ट फतेह करने जैसे साहसिक कार्य हमें यह सन्देश देते है कि जीवन में कोई भी चुनौती असंभव नही है।पर्वत या अन्य ऐसे ही साहसिक खेल हमें यह प्रेरणा देते है कि जीवन की कठिनाई स्वाभाविक है लेकिन यह स्थाई नही है और कठिनाईयों के बाद सुगम्य जीवन आसान है। पांडेय ने बताया कि बच्चों को खेलों के माध्यम से साहसिक जीवन की ओर उन्मुख किया जा सकता है।आज के जीवन में बच्चों को हमने साहसिक गतिविधियों से जानबूझकर दूर कर दिया है।मोबाइल ने जीवन एकांगी बना दिया है ऐसे बच्चों के सामने भविष्य में बहुत व्यवहारिक दिक्कत आनी सुनिश्चित है। पांडेय ने जोर देकर कहा कि रस्सी कूदना,पैराशूट से उड़ना,राफ्टिंग,पैरा ग्लाइडिंग जैसे खेलों के प्रति जागरूकता स्कूली बच्चों में मातापिता को भी विकसित करना चाहिये क्योंकि इन गतिविधियों से भयमुक्त बाल विकास सुनिश्चित होता है।ई संगोष्ठी में देश भर के 17 राज्यों के बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।कार्यक्रम का संचालन सीसीएफ के राष्ट्रीय सचिव डॉ कृपाशंकर चौबे ने किया जबकि आभार प्रदर्शन की रस्म कोषाध्यक्ष राकेश अग्रवाल ने पूर्ण की

उक्त वेबिनार में जांजगीर चांपा जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष नम्रता पटेल व सुरेन्द्र साहू सरगुजा से मधु पाण्डे कोरबा जुड़ी रही हैं, तथा नम्रता पटेल ने भी इस वर्चुअल मीटिंग के दौरान अपने अनेकों सुझाव दिए

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