नई दिल्ली। देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में शामिल इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा को वैश्विक ट्रांजिट हब के रूप में विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। यात्रियों की बढ़ती संख्या और बेहतर कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट पर ऑटोमेटेड एयर ट्रेन (Automated People Mover) चलाने की योजना बनाई गई है।
इस परियोजना के शुरू होने के बाद यात्रियों को टर्मिनल-1, टर्मिनल-2 और टर्मिनल-3 के बीच आने-जाने में आसानी होगी। खासकर ट्रांजिट यात्रियों को इससे बड़ी राहत मिलेगी और उनका यात्रा समय कम होगा।
4000 करोड़ रुपये की परियोजना
दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) के अनुसार, करीब 4000 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को अगले 30 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत एयरपोर्ट परिसर के टर्मिनलों, एरोसिटी और कार्गो सिटी को आधुनिक स्वचालित रेल सिस्टम से जोड़ा जाएगा।
करीब 7.7 किलोमीटर लंबी एयर ट्रेन लाइन विकसित की जाएगी। इसमें लगभग 5.7 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड होगा, जबकि करीब 2 किलोमीटर ट्रैक जमीन पर बनाया जाएगा।
ट्रांजिट यात्रियों के लिए मुफ्त होगी सेवा
डायल के मुताबिक, कनेक्टिंग फ्लाइट वाले यात्रियों के लिए एयर ट्रेन सेवा मुफ्त रहेगी। वहीं, अन्य यात्रियों को इस सुविधा के लिए निर्धारित शुल्क देना पड़ सकता है।
एयर ट्रेन में सफर के लिए यात्रियों को बोर्डिंग पास स्कैन करना होगा, जिससे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और केवल अधिकृत यात्री ही इसका इस्तेमाल कर सकेंगे।
विदेशों की तकनीक से तैयार होगा सिस्टम
एयर ट्रेन के लिए दक्षिण कोरिया, जकार्ता, इटली और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में संचालित आधुनिक एयरपोर्ट ट्रांजिट सिस्टम का अध्ययन किया गया है। तकनीक और ट्रेन सिस्टम विदेशों से लाए जाने की संभावना है, जबकि ट्रैक और स्टेशन निर्माण जैसे काम भारतीय कंपनियों को दिए जाएंगे।
AI से होगी भीड़ की निगरानी
दिल्ली एयरपोर्ट पर यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए AI आधारित एक्सओविस (Xovis) लाइन मैनेजमेंट सिस्टम भी लागू किया गया है। यह सिस्टम यात्रियों की आवाजाही, कतार और प्रतीक्षा समय का रियल टाइम विश्लेषण करता है।
अधिकारियों के अनुसार, इन नई सुविधाओं से दिल्ली एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ेगी और इसे दुनिया के प्रमुख ट्रांजिट हब की श्रेणी में लाने में मदद मिलेगी।