सरकार ने वापस ली B&B पॉलिसी, नियम तोड़ने वालों के लाइसेंस होंगे रद्द

नई दिल्ली। मालवीय नगर होटल अग्निकांड के बाद दिल्ली सरकार ने बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) पॉलिसी वापस लेने का फैसला किया है। सरकार ने इस योजना के तहत संचालित सभी होटल, गेस्ट हाउस और आवासीय प्रतिष्ठानों की व्यापक समीक्षा और जांच के निर्देश दिए हैं।

दिल्ली सरकार में पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने बताया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में यह फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि मालवीय नगर की घटना ने सुरक्षा मानकों और लाइसेंसिंग व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिसके मद्देनजर सरकार ने सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है।

सभी प्रतिष्ठानों की होगी जांच

पर्यटन मंत्री ने कहा कि B&B लाइसेंस के तहत संचालित सभी प्रतिष्ठानों की जांच की जाएगी। निरीक्षण के दौरान फायर सेफ्टी व्यवस्था, भवन मानकों, लाइसेंस की शर्तों और अन्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन की समीक्षा की जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी प्रतिष्ठान में सुरक्षा मानकों की अनदेखी, अनियमितता या लाइसेंस नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

6 कमरों से अधिक संचालन पर कार्रवाई

कपिल मिश्रा ने बताया कि B&B लाइसेंस के तहत अधिकतम 6 कमरों के संचालन की अनुमति होती है। यदि जांच में किसी प्रतिष्ठान में निर्धारित सीमा से अधिक कमरे संचालित होते पाए गए, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ लाइसेंस निरस्तीकरण की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

सरकार भवन की क्षमता, कमरों की संख्या, सुरक्षा व्यवस्था और दस्तावेजों की भी विस्तृत जांच कराएगी।

सुरक्षा को प्राथमिकता

मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता नागरिकों और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। B&B योजना का उद्देश्य सीमित स्तर पर आवास सुविधा उपलब्ध कराना था, लेकिन यदि इसकी आड़ में बड़े पैमाने पर होटल या व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, तो ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सरकार का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यह भी तय किया जाएगा कि भविष्य में B&B योजना को नए स्वरूप में लागू किया जाए या इसे पूरी तरह समाप्त रखा जाए।

गौरतलब है कि मालवीय नगर स्थित एक होटल में हुए भीषण अग्निकांड में 21 लोगों की मौत हो गई थी। जांच में सामने आया था कि होटल में सुरक्षा मानकों और लाइसेंस संबंधी नियमों का गंभीर उल्लंघन किया गया था, जिसके बाद सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है।

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