दिल्ली | दिल्ली हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) को डीरजिस्टर करने और अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को चुनाव लड़ने से रोकने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) को पूरी तरह खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिका कानूनी रूप से कमजोर और गलतफहमी पर आधारित है।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि शराब नीति मामले की सुनवाई के दौरान नेताओं ने अदालत की कार्यवाही का बहिष्कार किया और सोशल मीडिया पर जज के खिलाफ अभियान चलाया। याचिका दायर करने वालों ने AAP का पंजीकरण रद्द करने और नेताओं को चुनाव लड़ने से रोकने की मांग की थी।
दिल्ली हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस देवेन्द्र उपाध्याय की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी राजनीतिक पार्टी का पंजीकरण केवल तभी रद्द किया जा सकता है, जब उसे UAPA या इसी तरह के कानून के तहत गैरकानूनी संगठन घोषित किया गया हो। कोर्ट ने कहा कि याचिका में कोई कानूनी आधार नहीं है और इसे सुनवाई योग्य नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29A(5) का उल्लंघन केवल तभी कार्रवाई का आधार बन सकता है, जब पार्टी संविधान और उसके मूल सिद्धांतों का पालन न करे, न कि राजनीतिक आलोचना या सोशल मीडिया गतिविधियों के कारण।
इस फैसले के बाद AAP और उसके नेताओं को चुनाव लड़ने पर कोई रोक नहीं है और याचिका पूरी तरह खारिज हो गई।