मुंबई। भारतीय संगीत जगत की प्रसिद्ध पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने मुंबई स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से संगीत और फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। अपनी मधुर और सुरीली आवाज से लाखों श्रोताओं के दिलों में जगह बनाने वाली सुमन कल्याणपुर भारतीय संगीत जगत की सबसे सम्मानित गायिकाओं में शुमार थीं।
सुमन कल्याणपुर का जन्म 28 जनवरी 1937 को अविभाजित भारत के भवानीपुर (वर्तमान बांग्लादेश) में हुआ था। विवाह से पहले उन्हें सुमन हेमडी के नाम से जाना जाता था, लेकिन शादी के बाद उन्होंने सुमन कल्याणपुर नाम से संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।
उन्होंने महान कवि जी. डी. माडगुलकर के गीतों के साथ मराठी संगीत जगत में अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद ‘निम्बोनिचा झाडामागे’, ‘अरे संसार संसार’, ‘केतकीचा बनी तिथे नाचला मोर’ और ‘रिमझिम झरती श्रावणधारा’ जैसे कई लोकप्रिय गीतों को अपनी आवाज दी। उनके गीत आज भी संगीत प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
मराठी संगीत के अलावा सुमन कल्याणपुर ने हिंदी, गुजराती और बंगाली भाषाओं में भी हजारों गीत गाए। उनकी गायकी की खास पहचान उनकी मधुरता, स्पष्ट उच्चारण और भावपूर्ण प्रस्तुति रही।
संगीत के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2023 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था। यह सम्मान भारतीय संगीत जगत में उनके दशकों लंबे योगदान की स्वीकृति के रूप में दिया गया था।
सुमन कल्याणपुर का निधन भारतीय संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनके गीत आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करते रहेंगे।