दिल्ली में दर्दनाक हादसा, रोहिणी में इमारत गिरने से चार लोगों की मौत; रेस्क्यू जारी

नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-16 में निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत गिरने से बड़ा हादसा हो गया। हादसे में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। मलबे में कुछ और लोगों के दबे होने की आशंका को देखते हुए राहत और बचाव अभियान जारी है।

घटना की सूचना मिलने के बाद दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS), NDRF, MCD, राजस्व विभाग, एंबुलेंस सेवा और अन्य एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं और बचाव कार्य शुरू किया।

पुलिस के अनुसार, हादसे की सूचना शाम करीब 4:30 बजे मिली थी। राहत टीमों ने मलबे से कई लोगों को बाहर निकाला। गंभीर रूप से घायल 42 वर्षीय राम किशोर को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वहीं अन्य मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। घायलों में रवि और सद्दाम शामिल हैं, जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है।

स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल

हादसे के बाद स्थानीय निवासियों और आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों ने निर्माण कार्यों की निगरानी को लेकर सरकारी विभागों पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि दिल्ली में अवैध निर्माण और भवन नियमों के उल्लंघन की समय पर जांच नहीं होने के कारण ऐसे हादसे सामने आते हैं।

स्थानीय लोगों ने DDA, MCD, दिल्ली अग्निशमन सेवा और अन्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय और नियमित निरीक्षण की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माणाधीन इमारतों की सुरक्षा जांच को और प्रभावी बनाया जाना चाहिए।

DDA ने दी सफाई

रोहिणी हादसे के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने बयान जारी कर कहा कि जिस क्षेत्र में इमारत गिरी है, उसे वर्ष 2016 में डी-नोटिफाई कर दिया गया था। इसके बाद क्षेत्र का प्रशासनिक नियंत्रण और रखरखाव संबंधित स्थानीय निकाय को सौंप दिया गया था।

प्लंबिंग कार्य के दौरान ड्रिलिंग से नुकसान की आशंका

MCD अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इमारत में फिनिशिंग का काम चल रहा था। प्लंबिंग कार्य के दौरान कथित तौर पर कॉलम और बीम में ड्रिलिंग या छेद किए गए थे, जिन्हें हादसे की संभावित वजहों में से एक माना जा रहा है। हालांकि, घटना के वास्तविक कारणों की जांच जारी है।

28 लाख इमारतों के सर्वे में 19 भवन मिले खतरनाक

MCD अधिकारियों ने बताया कि संभावित रूप से खतरनाक इमारतों की पहचान के लिए हर साल सर्वे अभियान चलाया जाता है। इस वर्ष 27 जून तक करीब 28 लाख इमारतों का सर्वे किया गया, जिसमें 19 भवन खतरनाक श्रेणी में पाए गए। इन भवनों के मालिकों को आवश्यक कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किए गए हैं।

फिलहाल रोहिणी हादसे की जांच जारी है और बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं।

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