पश्चिम बंगाल| पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी से एक बेहद दिल को छू लेने वाली और रोमांचक घटना सामने आई है। तीस्ता नदी की उफनती और तेज धार में बह रहे एक नवजात हाथी के बच्चे को पांच स्थानीय मछुआरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बचा लिया। हालांकि, बच्चे को बचाना ही काफी नहीं था, असली चुनौती उसे सुरक्षित उसकी मां तक वापस पहुंचाना थी, जिसे वन विभाग और स्थानीय लोगों ने सफलतापूर्वक पूरा कर लिया।
कैसे नदी में बह गया नन्हा हाथी?
सोमवार को जलपाईगुड़ी में हाथियों का एक झुंड तीस्ता नदी पार कर रहा था। इसी दौरान तेज बहाव के बीच एक नवजात बच्चा अपनी मां से अलग हो गया और पानी के तेज बहाव में करीब 4 किलोमीटर नीचे बहता चला गया। बच्चा गजोलडोबा के पास तीस्ता के 12वें स्पर और पंजाब तटबंध के नजदीक पानी में खुद को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा था।
‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, मौके पर मौजूद बाबलू दास, मिथुन दास, कादर दास, बिस्वनाथ और गोपाल नाम के पांच मछुआरों ने बिना एक पल गंवाए अपनी छोटी नाव नदी में उतार दी। तेज बहाव के बीच उनमें से तीन मछुआरे पानी में उतरे और किसी तरह बच्चे को खींचकर नाव तक लाए। वापसी के दौरान भी उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए नाव के साथ तैरकर उसे सुरक्षित किनारे पर पहुंचाया।
बचाव के बाद शुरू हुई मां की तलाश
मछुआरों द्वारा किनारे लाए जाने के तुरंत बाद वन विभाग की टीम हरकत में आई। बच्चे को काठामबाड़ी रेंज कार्यालय ले जाया गया, जहां तुरंत वेटनरी डॉक्टरों की देखरेख में उसका प्राथमिक इलाज और स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
बैकुंठपुर के DFO मुदित कुमार ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि यह बच्चा महज चार दिन का था और नदी पार करते वक्त अपनी मां से बिछड़ गया था। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि नवजात को ज्यादा देर इंसानों के पास न रखा जाए, वरना उसका झुंड उसे अपनाने से इंकार कर सकता है (जैसा कि पिछले साल उत्तर बंगाल की बाढ़ के दौरान मेची नदी के एक मामले में हुआ था, जहां बचाए गए बच्चे को जालदापाड़ा भेजना पड़ा था)।
दो घंटे बाद मां ने लगाया गले
वनकर्मियों, स्थानीय लोगों और मछुआरों ने मिलकर सूझबूझ दिखाई और बच्चे को गजोलडोबा बैराज के दूसरी तरफ नदी के उस सूखे हिस्से तक ले गए, जहां माना जा रहा था कि हाथियों का वह झुंड रुका हुआ था।
सर्च ऑपरेशन के दौरान करीब दो घंटे की कोशिशों के बाद मां हाथी अपने बच्चे तक पहुंच गई और उसने उसे फौरन स्वीकार कर लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके बाद मां को अपने बच्चे को दुलारते और दूध पिलाते हुए भी देखा गया।
मछुआरों की त्वरित बहादुरी और वन विभाग की मुस्तैदी से इस संभावित त्रासदी का एक बेहद सुखद अंत हुआ, जहां न सिर्फ नन्हे हाथी की जान बची, बल्कि वह अपनी मां की आंचल में भी सुरक्षित लौट आया।