नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने मीडिया में सकारात्मक खबरों को पर्याप्त स्थान न मिलने पर चिंता जताते हुए कहा कि अगर युवाओं को सही दिशा और मार्गदर्शन नहीं मिलेगा, तो वे गलत या व्यंग्यपूर्ण प्लेटफॉर्म का अनुसरण करने लगेंगे। उन्होंने इसे उदाहरण के तौर पर ‘कॉकरोच’ कहा, जिसका इशारा ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की ओर था।
उपराष्ट्रपति ने यह विचार मलयालम दैनिक ‘दीपिका’ की 140वीं वर्षगांठ समारोह में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि समाज को सही दिशा दिखाने और लोगों का भरोसा मजबूत करने के लिए रचनात्मक और सकारात्मक पत्रकारिता बेहद जरूरी है। मीडिया में केवल नकारात्मक या विवादित खबरों पर ध्यान देने के बजाय समाज में हो रहे सकारात्मक कार्यों और उपलब्धियों की रिपोर्टिंग को प्रमुखता दी जानी चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने युवाओं के बीच सोशल मीडिया पर बढ़ती सक्रियता और वायरल कंटेंट की ओर इशारा करते हुए कहा, “अगर मीडिया सकारात्मक उपलब्धियों को उजागर नहीं करेगा, तो युवा दिशाहीन होकर ‘कॉकरोच’ जैसे प्लेटफॉर्म को फॉलो कर सकते हैं।” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या कोई चीज वास्तव में केवल एक ही दिन में इतना ध्यान आकर्षित करने लायक हो सकती है, और यह स्थायी नहीं हो सकता।
इसके अलावा, उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के आत्मविश्वासपूर्ण विकास की सराहना की और कहा कि 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए समाज के हर वर्ग का सकारात्मक योगदान बेहद जरूरी है।
उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर जोर देकर कहा कि नेक विचार और सकारात्मक संदेश समाज के हर कोने तक पहुंचाने की जिम्मेदारी मीडिया और युवाओं की है, ताकि देश की प्रगति के मार्ग में बाधा न आए।