वनमंडल एवं सर्पमित्रों के दल नें दुर्लभ हिरण को सुरक्षित वन में छोड़ा

बैलाडीला की पहाड़ियां हमेशा से ही अपना एक अलग परिस्थिक तंत्र बनाएं हुए हैं,छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर क्षेत्र में स्थित बैलाडीला की ये पहाड़ियां केवल लौह अयस्क ही नहीं अपितु अपने प्राकृतिक सौंदर्य और अनोखे जीवों के लिए भी चर्चा का विषय बनता जा रहा हैं।ऐसा ही एक जीव कुछ दिन पहले 22/07/2022 बचेली के सुभाष नगर में रात के समय जंगल से भटकते हुए आ गया,जिसकी सूचना वहां के लोगों ने वन विभाग को दी तत्पश्चात बचेली वन परिक्षेत्र अधिकारी आशुतोष मांडवा ने अपनी टीम जिसमे , डिप्टी रेंजर अघन श्याम भगत, बीट आफीसर राजेश कर्मा सहित वन कर्मी के साथ उस जीव को आवासीय इलाके से निकाल के कार्यालय ले गए।

 

वन परिक्षेत्र अधिकारी आशुतोष मांडवा नें बताया की घटना की सूचना उच्च अधिकारियों को दी गई। तथा उनके परामर्श अनुसार तत्पश्चात रायपुर जंगल सफारी के पशु चिकित्सक से परामर्श लेकर बचेली के पशु चिकित्सक से इस जीव की जांच करावाई। जीव थोड़ा घबराया हुआ और थोड़ा चोटिल था। इसलिए पशुचिकित्सक से उसका उपचार करवा के ठीक होने पे उसे घने जंगलों में दिनांक 26/7/2022 आज़ाद कर दिया गया। इस कार्य में अमित मिश्रा, अक्षय मिश्रा मनोज हलधर, मनोज कश्यप एवं दीपक ठाकुर का विशेष योगदान रहा। हिरण के आहार हेतू विशेष जंगली घांस, अमरूद, डूमर एवं अन्य फलो की प्रतिदिन व्यवस्था करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी इन सब नें वन विभाग के कर्मचारियों के साथ मिलकर की।

सर्प मित्र एवं पर्यावरण प्रेमी अमित मिश्रा नें बताया यह अत्यंत दुर्लभ प्रजाति का हिरण, इंडियन माउस डियर (इंडियन स्पॉटेड शेवरोटेन) जिसका वैज्ञानिक नाम मोसियोला इंडिका हैं।ये विश्व की सबसे छोटी हिरण की प्रजाति मानी जाती हैं, इसकी लंबाई 57.5 cm होती हैं और वज़न 3 किलोग्राम के आस पास होता हैं। ये रात में निकलने वाला जीव हैं। और बहुत मुश्किल से ही देखने को मिलता हैं। यहां तक की कैमरा ट्रैप में भी इसकी कम ही तस्वीरे हैं। ये छुपने में बहुत माहिर होता हैं। और जंगल में इसे देख पाना भी आसान नहीं होता यहीं कारण हैं। की इसके बैलाडीला में होने की जानकारी अब तक नहीं थी।

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