रायपुर । जशपुर जिले में कृषि को मूल्य संवर्धन आधारित व्यवसाय के रूप में विकसित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल की है। कृषि, उद्यानिकी विभाग, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के अधिकारियों व प्रतिनिधियों ने महाराष्ट्र के नासिक स्थित सह्याद्री फार्म्स का अध्ययन एवं प्रशिक्षण भ्रमण किया। इस दौरे का उद्देश्य बगीचा विकासखंड के शहीदांड में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड पैक हाउस के प्रभावी संचालन के लिए आधुनिक कृषि और प्रसंस्करण मॉडल का अध्ययन करना था।
भ्रमण के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने सह्याद्री फार्म्स के सफल एफपीओ मॉडल, गुणवत्ता नियंत्रण, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और निर्यात प्रणाली का गहन अध्ययन किया। टीम ने अंगूर, अनार सहित विभिन्न उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों के खेतों का निरीक्षण कर ड्रिप सिंचाई, वैज्ञानिक खेती, फसल कटाई उपरांत प्रबंधन और निर्यातोन्मुख उत्पादन तकनीकों की जानकारी हासिल की।
अधिकारियों ने सह्याद्री फार्म्स के अत्याधुनिक वैल्यू एडिशन और प्रोसेसिंग प्लांट का भी अवलोकन किया, जहां ग्रेडिंग, सॉर्टिंग, धुलाई, पल्प निर्माण, एसेप्टिक पैकेजिंग, कोल्ड चेन और निर्यात पैकेजिंग जैसी प्रक्रियाओं को समझा। अधिकारियों का मानना है कि इन तकनीकों के जरिए किसानों की उपज का मूल्य बढ़ाने और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।
शहीदांड में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड पैक हाउस को किसानों, एफपीओ, स्वयं सहायता समूहों और कृषि उद्यमियों के लिए आधुनिक कॉमन फैसिलिटी सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां टमाटर, आम, नाशपाती, कटहल, लीची और खीरा सहित विभिन्न कृषि एवं उद्यानिकी उत्पादों की ग्रेडिंग, पैकेजिंग, संरक्षण और प्रसंस्करण की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
जिला प्रशासन के अनुसार इस परियोजना से फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आएगी, किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिलेगा और एफपीओ को बड़े खरीदारों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों तथा निर्यात बाजारों से जुड़ने के नए अवसर प्राप्त होंगे। प्रशासन का कहना है कि सह्याद्री फार्म्स से मिले अनुभवों को शहीदांड पैक हाउस के संचालन में लागू किया जाएगा, जिससे जशपुर में कृषि को मूल्य संवर्धन आधारित एग्री-बिजनेस के रूप में नई पहचान मिलेगी।