भारत | भारत का राष्ट्रीय पक्षी भारतीय मोर सिर्फ अपनी खूबसूरती और सांस्कृतिक महत्व के लिए ही नहीं, बल्कि कानूनी संरक्षण के लिए भी खास पहचान रखता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि मोर की मौत होने पर उसका अंतिम संस्कार पूरे सम्मान और निर्धारित सरकारी प्रक्रिया के तहत किया जाता है।
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें मृत मोर को तिरंगे में लपेटकर सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दी जाती दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय प्रतीक होने के कारण मोर के शव का अंतिम संस्कार राज्य वन विभाग की देखरेख में किया जाता है।
दरअसल, मोर को भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 में शामिल किया गया है। इस श्रेणी में आने वाले वन्यजीवों को सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त होता है। कानून के मुताबिक अनुसूची-1 के किसी भी जीव का मृत शरीर सरकार की संपत्ति माना जाता है, इसलिए उसका निपटान या अंतिम संस्कार केवल अधिकृत वन विभाग ही कर सकता है।
भारत सरकार ने 26 जनवरी 1963 को मोर को राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया था। भारतीय संस्कृति, धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं में मोर का विशेष महत्व माना जाता है।
वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत मोर या किसी भी संरक्षित पक्षी को नुकसान पहुंचाना गंभीर अपराध है। इसके लिए सात साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।