नक्सलवाद के घावों पर मरहम लगाएगी सरकार, बस्तर के 200 से अधिक सुरक्षा शिविर बनेंगे ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’: अमित शाह

दंतेवाड़ा । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद से मुक्ति के बाद अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी हिंसा से प्रभावित लोगों के घावों पर मरहम लगाना, उनका पुनर्वास करना और उन्हें सम्मानपूर्ण जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराना है। नक्सलवाद ने पांच दशकों तक बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों को गहरी पीड़ा दी है। अब नक्सलवाद की हर निशानी मिटाकर बस्तर को फिर से खुशहाल, समृद्ध और विकसित बनाना सरकार का संकल्प है।

केंद्रीय गृह मंत्री गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत दंतेवाड़ा में आयोजित निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी वर्चुअली शामिल हुए।

अमित शाह ने कहा कि नक्सली हिंसा से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करना और आत्मनिर्भर बनाना केंद्र एवं राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इस दिशा में भारत सरकार छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है।

तीन दिवसीय शिविर में 768 दिव्यांगजनों को मिलेगी सहायता

दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित शिविर में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिले के कुल 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण प्रदान किए जाएंगे। इनमें दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 लाभार्थी शामिल हैं।

शिविर का आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है। लाभार्थियों को व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र, स्मार्ट वॉकिंग स्टिक और कृत्रिम अंग जैसे उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोटों में अनेक निर्दोष नागरिक दिव्यांग हुए। यह मानवता के विरुद्ध गंभीर अपराध है। ऐसे लोगों को सहायता देकर उनके जीवन में आत्मविश्वास और नई उम्मीद जगाना सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने बताया कि 5 से 7 अक्टूबर तक जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे, जिनमें बस्तर के 1,570 से अधिक लोग शामिल थे।

आत्मसमर्पण करने वाले 8,526 नक्सलियों के पुनर्वास के प्रयास

अमित शाह ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और विकास से जुड़े प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि लगभग 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। पुनर्वास के तहत 7,328 लोगों के बैंक खाते खोले गए, 1,620 लोगों को इनामी राशि और 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इसके अलावा 455 लोगों को नौकरी दी गई और 129 लोगों को भूमि आवंटित की गई।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4,014 आवास उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं, 2,308 आदिवासियों को कौशल विकास प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे रोजगार और स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 6,763 नए राशन कार्ड बनाए गए और 2,808 परिवारों को निःशुल्क बिजली उपलब्ध कराई गई। संपर्क सुविधाओं के विस्तार के लिए 372 नई सड़क परियोजनाएं शुरू की गई हैं तथा 670 पुलियों का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा 48,526 लोगों के आधार कार्ड बनाए गए हैं और 44 पंचायतों को इलवाद पंचायत पुरस्कार के तहत पुरस्कृत किया गया है।

गृह मंत्री ने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके जीवन में स्थायी बदलाव लाना है।

200 से अधिक सुरक्षा शिविर बनेंगे सेवा और विकास के केंद्र

बस्तर के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा करते हुए अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान के दौरान स्थापित 500 से अधिक सुरक्षा शिविरों में से 200 से अधिक को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर पहले सुरक्षा बलों के जवान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करते थे, वहीं अब केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी बैठकर विकास एवं जनकल्याण के कार्यों को आगे बढ़ाएंगे।

इन सेवा डेरों के माध्यम से स्थानीय लोगों को सरकारी योजनाओं, कौशल विकास, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर सुविधाएं मिल सकेंगी।

अमित शाह ने कहा कि बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम, नियद नेल्लानार और मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना जैसी पहलों से क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। कभी भय और हिंसा के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर में अब युवा खेलों में भाग ले रहे हैं और अपनी संस्कृति एवं परंपराओं को नई पहचान दे रहे हैं।

नक्सलमुक्त बस्तर को विकसित जनजातीय क्षेत्र बनाना लक्ष्य: मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से छत्तीसगढ़ को दशकों पुरानी नक्सलवाद की चुनौती से मुक्ति मिली है। यह उपलब्धि सुरक्षा बलों के साहस, पराक्रम और बलिदान तथा बस्तर की जनता के सहयोग से संभव हुई है।

मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में शहीद हुए जवानों और हिंसा में जान गंवाने वाले निर्दोष ग्रामीणों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि बस्तर की जनता लंबे समय से शांति, सुरक्षा और विकास चाहती थी। अब समय आ गया है कि इस क्षेत्र को विकास की दौड़ में आगे लाया जाए।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प बस्तर को देश के सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्रों में अग्रणी बनाना है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस दिशा में कार्य कर रही हैं।

‘नियद नेल्लानार’ से दूरस्थ गांवों तक पहुंच रही विकास की रोशनी

मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से बस्तर के दूरस्थ गांवों तक सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि 500 से अधिक गांवों में सड़क और बिजली की सुविधाएं पहुंची हैं। इन क्षेत्रों में 431 स्कूल खोले गए हैं और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। ग्रामीणों की सुविधा के लिए गांवों में राशन दुकानों की व्यवस्था भी की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि बस्तर के अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचे। दशकों तक बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे क्षेत्रों में अब विकास की नई संभावनाएं बन रही हैं।

सेवा डेरों से खुलेंगे रोजगार और स्वरोजगार के अवसर

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुरक्षा शिविरों को सेवा डेरों में बदलना बस्तर में बदलाव का महत्वपूर्ण कदम है। इन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय युवाओं और ग्रामीण परिवारों को प्रशिक्षण तथा आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि शहीद वीर गुंडाधुर के गांव नेतानार में पहला सेवा डेरा शुरू किया गया है। यहां स्थानीय लोगों को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी पद्धति से चावल तैयार करने जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका के अवसर ग्रामीणों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेंगे।

सिंचाई परियोजनाओं से 80 हजार एकड़ भूमि को मिलेगा लाभ

मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर में कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार में बड़ी सिंचाई परियोजनाओं के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर लगभग 80 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा पशुपालन और डेयरी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण परिवारों को दो-दो गायें उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है।

उन्होंने कहा कि कृषि, पशुपालन और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में सहायता मिलेगी।

दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना सरकार की जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नक्सली हिंसा के कारण अनेक निर्दोष ग्रामीणों ने अपने अंग गंवाए हैं। कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराना केवल सहायता देना नहीं, बल्कि प्रभावित लोगों को आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर देना है।

उन्होंने भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और सहयोगी संस्थाओं के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि सरकार का प्रयास है कि हिंसा से प्रभावित कोई भी व्यक्ति पुनर्वास और जरूरी सहायता से वंचित न रहे।

कार्यक्रम के दौरान लाभार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। सुकमा के दिव्यांग पुलिस जवान मड़काम मुन्ना ने बताया कि वर्ष 2013 में गश्त के दौरान आईईडी विस्फोट में उनका बायां पैर क्षतिग्रस्त हो गया था। कृत्रिम पैर मिलने से वे दोबारा चलने लगे हैं और देशसेवा के लिए तैयार हैं।

बीजापुर जिले के धर्मारम निवासी चंद्रैया सपका ने बताया कि वर्ष 2012 में आईईडी विस्फोट में उनका दायां पैर चला गया था। कृत्रिम पैर मिलने के बाद अब वे फिर से चल पा रहे हैं। वहीं, दंतेवाड़ा के अजय सोरी और कोसी पोडियाम ने ट्राइसाइकिल मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की।

हिंसा से मुक्ति के बाद विकास की नई शुरुआत

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सली हिंसा ने बस्तर के अनेक निर्दोष ग्रामीणों का जीवन प्रभावित किया है। सरकार का प्रयास है कि प्रभावित लोगों तक पुनर्वास और सहायता लगातार पहुंचती रहे। उन्होंने कहा कि बस्तर की जनता और सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयासों से क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।

कार्यक्रम में बस्तर सांसद महेश कश्यप, विधायक चैतराम अटामी, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य ओजस्वी मंडावी सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलवाद से मुक्ति के बाद बस्तर में विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और संस्कृति के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुली हैं। सरकार का संकल्प है कि बस्तर का प्रत्येक गांव विकास की मुख्यधारा से जुड़े, युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिलें और हर परिवार के जीवन में खुशहाली आए।

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