DDA हाउसिंग स्कीम में तकनीकी गड़बड़ी पड़ी भारी, आयोग ने महिला डॉक्टर के पक्ष में सुनाया फैसला

नई दिल्ली। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के आवास पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ी के कारण फ्लैट गंवाने वाली एक महिला डॉक्टर को उपभोक्ता आयोग से बड़ी राहत मिली है। दक्षिण (II) जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने DDA को महिला डॉक्टर की जमा की गई राशि ब्याज समेत लौटाने का आदेश दिया है।

आयोग ने कहा कि किसी सरकारी पोर्टल या ऑनलाइन व्यवस्था की तकनीकी खराबी का खामियाजा उपभोक्ता को नहीं भुगतना चाहिए। मामले में DDA को सेवा में लापरवाही का जिम्मेदार माना गया।

पोर्टल में गड़बड़ी से अटकी थी प्रक्रिया

मामला दक्षिण दिल्ली के अलकनंदा निवासी डॉ. आकांक्षा मौर्या से जुड़ा है। उन्होंने DDA की हाउसिंग स्कीम 2021 के तहत फ्लैट के लिए आवेदन किया था और बुकिंग राशि के तौर पर दो लाख रुपये जमा किए थे।

10 मार्च 2021 को हुए ड्रॉ में उन्हें द्वारका सेक्टर-19B में पांचवीं मंजिल का MIG फ्लैट नंबर 169 आवंटित हुआ था। नियमों के मुताबिक आवंटन के बाद डिमांड लेटर पोर्टल पर उपलब्ध होना था, ताकि आवेदक आगे की राशि जमा कर सके।

लेकिन डॉ. आकांक्षा के पोर्टल पर डिमांड लेटर देखने का विकल्प ही नहीं आया। उन्होंने कई बार DDA हेल्पलाइन और अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।

परेशान होकर करना पड़ा फ्लैट सरेंडर

कई महीनों तक इंतजार के बाद 8 जुलाई 2021 को DDA ने ई-मेल के जरिए जानकारी दी कि तकनीकी समस्या दूर हो गई है और डिमांड लेटर अब देखा जा सकता है।

हालांकि, लगातार परेशानी और मानसिक तनाव के कारण डॉ. आकांक्षा ने उसी दिन फ्लैट सरेंडर कर दिया और जमा राशि वापस मांगी।

DDA ने रिफंड देने से इनकार करते हुए तर्क दिया कि आवेदक ने तय समय सीमा में फ्लैट रद्द नहीं कराया। वहीं महिला डॉक्टर का कहना था कि तकनीकी खराबी के कारण वह डिमांड लेटर देख ही नहीं सकीं।

आयोग ने DDA के तर्क को नहीं माना

मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचने के बाद सुनवाई में सामने आया कि शिकायतकर्ता लगातार तकनीकी समस्या को लेकर DDA से संपर्क में थीं। आयोग ने माना कि DDA अपने दावों के समर्थन में पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सका।

आयोग की अध्यक्ष मोनिका अग्रवाल श्रीवास्तव और सदस्य डॉ. राजेंद्र धर की पीठ ने DDA को जिम्मेदार ठहराया।

6% ब्याज और मुआवजे का आदेश

आयोग ने DDA को निर्देश दिया कि महिला डॉक्टर की दो लाख रुपये की जमा राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाई जाए।

आदेश का पालन दो महीने के भीतर नहीं करने पर ब्याज दर बढ़ाकर 7 प्रतिशत वार्षिक कर दी जाएगी।

इसके अलावा, महिला डॉक्टर को हुई मानसिक परेशानी के लिए DDA को 25 हजार रुपये मुआवजा और मुकदमे के खर्च के रूप में 5 हजार रुपये देने का भी आदेश दिया गया है।

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