नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौती से राजस्व में करीब ₹1 लाख करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है। यह जानकारी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी।
मुंबई में आयोजित एसआईडीबीआई (SIDBI) के 37वें स्थापना दिवस समारोह में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि ईंधन पर टैक्स घटाने का फैसला वैश्विक ऊर्जा संकट और जनता को राहत देने के उद्देश्य से लिया गया था।
सरकार ने पहले पेट्रोल और डीजल पर स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में ₹10-₹10 की कटौती की थी। इसके बाद पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 प्रति लीटर से घटाकर ₹3 और डीजल पर ₹10 से शून्य कर दी गई थी।
वित्त मंत्री के अनुसार, इस फैसले का सीधा असर राजस्व पर पड़ा है और लगभग ₹1 लाख करोड़ का नुकसान दर्ज किया गया है। हालांकि उन्होंने कहा कि यह कदम आम जनता और उद्योगों को राहत देने के लिए जरूरी था।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव मुख्य रूप से बाहरी कारणों से है, जिनमें वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय संकट शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है और देश तेज गति से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
इसी कार्यक्रम में उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को निर्देश दिया कि MSME को भुगतान की 45 दिनों की समयसीमा का सख्ती से पालन किया जाए और लंबित भुगतान जल्द से जल्द निपटाए जाएं।
इधर, हाल के दिनों में तेल कंपनियों द्वारा पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी भी दर्ज की गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर फिर से बोझ बढ़ा है।