सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पर्यावरण मंजूरी के बिना शुरू नहीं होंगे नए प्रोजेक्ट, 2021 का आदेश रद्द

नई दिल्ली। पर्यावरण मंजूरी से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि अब किसी भी नई परियोजना को शुरू करने से पहले पर्यावरणीय मंजूरी (Environmental Clearance) लेना अनिवार्य होगा। अदालत ने कहा कि बिना पूर्व मंजूरी के किसी भी प्रोजेक्ट पर काम शुरू नहीं किया जा सकता।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पांचोली की पीठ ने पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन से जुड़ी 49 याचिकाओं पर फैसला सुनाया। कोर्ट ने केंद्र सरकार के वर्ष 2021 के उस कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) को रद्द कर दिया, जिसमें बिना पहले पर्यावरण मंजूरी लिए शुरू की गई परियोजनाओं को बाद में पूर्वव्यापी (Ex-post facto) पर्यावरण मंजूरी देने की व्यवस्था की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया का उद्देश्य परियोजनाओं के शुरू होने से पहले उनके संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन करना है।

भविष्य की परियोजनाओं पर लागू होगा फैसला

अदालत ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय भविष्य के मामलों पर लागू होगा। पहले से पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त कर चुकी परियोजनाएं इस फैसले से प्रभावित नहीं होंगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब कोई भी कंपनी या संस्था बिना आवश्यक पर्यावरणीय अनुमति प्राप्त किए निर्माण या अन्य गतिविधियां शुरू नहीं कर सकेगी।

केंद्र के 2021 आदेश पर रोक

केंद्र सरकार के 2021 के आदेश के तहत ऐसी परियोजनाओं को बाद में पर्यावरणीय मंजूरी देने का रास्ता खुला था, जिन्होंने पहले से काम शुरू कर दिया था। इस व्यवस्था को चुनौती देते हुए कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थीं।

याचिकाओं में पर्यावरण नियमों के उल्लंघन और बिना अनुमति शुरू की गई परियोजनाओं को लेकर आपत्ति जताई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद केंद्र के इस प्रावधान को निरस्त कर दिया।

इस फैसले के बाद विकास परियोजनाओं, उद्योगों और निर्माण कार्यों के लिए पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर सख्ती और बढ़ जाएगी।

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