नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई महिला अपनी आजीविका के लिए मर्जी से सेक्स वर्क करती है, तो इसे अपराध के दायरे में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल सहमति से किया गया सेक्स वर्क गैरकानूनी नहीं है, जबकि जबरदस्ती, धोखे या मानव तस्करी के मामले में इमोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट लागू होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला 70 साल पुराने अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम की समीक्षा के बाद सुनाया। अदालत ने कहा कि कानून का उद्देश्य वेश्यावृत्ति को पूरी तरह से खत्म करना नहीं बल्कि इसके व्यावसायीकरण पर नियंत्रण रखना है।
न्यायालय ने यह भी कहा कि सेक्स वर्कर भी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन जीने का अधिकार रखते हैं और उन्हें कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए।