NEET-UG | सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG पेपर लीक मामले में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है. सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि NTA ने पहले हुए पेपर लीक मामलों से कोई सबक नहीं लिया.
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि 2024 में भी इसी तरह का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. तब एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाई गई थी, जिसने कई महत्वपूर्ण सिफारिशें दी थीं और उन्हें स्वीकार भी किया गया था. कोर्ट ने NTA को निर्देश दिया है कि वह गुरुवार तक हलफनामा दाखिल कर बताए कि पिछली सिफारिशों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई.
सुप्रीम कोर्ट ने फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन, यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट और अन्य याचिकाओं को एक साथ सुनने का फैसला किया है. मामले की अगली सुनवाई 29 मई को होगी.
सुनवाई के दौरान FAIMA और UDF ने NTA को भंग कर नई और स्वायत्त राष्ट्रीय परीक्षा व्यवस्था बनाने की मांग की. संगठनों का कहना है कि लगातार पेपर लीक की घटनाओं से 22 लाख से ज्यादा छात्रों के भविष्य और मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं.
याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि नई व्यवस्था बनने तक एक हाई-पावर मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जाए, जिसकी अध्यक्षता रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज करें. इसमें साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाए ताकि परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाया जा सके.
बता दें कि NEET-UG परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित हुई थी, जिसमें करीब 23 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था. NTA के अनुसार 7 मई को परीक्षा में गड़बड़ी की जानकारी मिली थी, जिसके बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया. बाद में परीक्षा रद्द कर 21 मई को री-एग्जाम कराने का फैसला लिया गया.