नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड के कथित दुरुपयोग को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ-साथ भारतीय चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आधार कार्ड का उपयोग नागरिकता, निवास, पता और जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में गलत तरीके से किया जा रहा है, जबकि कानून के अनुसार इसका उद्देश्य केवल पहचान की पुष्टि करना है।
याचिकाकर्ता वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दलील दी है कि नए वोटर रजिस्ट्रेशन (फॉर्म-6) में आधार को जन्मतिथि और पते के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा रहा है, जो कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) अधिनियम के खिलाफ है। याचिका में कहा गया है कि आधार अधिनियम की धारा 9 स्पष्ट रूप से बताती है कि आधार नागरिकता या निवास का प्रमाण नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए सभी संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को निर्धारित की गई है।
याचिका में मांग की गई है कि आधार के उपयोग को केवल पहचान सत्यापन तक सीमित किया जाए और इसे नागरिकता या अन्य कानूनी प्रमाण के रूप में इस्तेमाल करने पर रोक लगाई जाए।