SpaceX | दुनिया के सबसे बड़े रॉकेट ‘स्टारशिप’ के तीसरे वर्जन V3 का सफल परीक्षण कर SpaceX ने अंतरिक्ष इतिहास में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है. एलन मस्क की कंपनी द्वारा किए गए फ्लाइट-12 टेस्ट के दौरान रॉकेट ने कई अहम चरण सफलतापूर्वक पूरे किए और आखिर में हिंद महासागर में लैंडिंग की.
हालांकि लैंडिंग के बाद रॉकेट में जोरदार विस्फोट हुआ, लेकिन इसके बावजूद इस मिशन को बड़ी सफलता माना जा रहा है. परीक्षण के दौरान एक इंजन फेल होने की जानकारी भी सामने आई, फिर भी स्टारशिप निर्धारित मिशन प्रोफाइल के मुताबिक समुद्र तक पहुंचने में कामयाब रहा.
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह “चांद के एक कदम और करीब, और मंगल के भी एक कदम और करीब” है. NASA एडमिनिस्ट्रेटर जैरेड आइजैकमैन ने लॉन्च की तस्वीरें साझा करते हुए इसे अमेरिका के भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए बड़ा कदम बताया.
यह स्टारशिप सीरीज का 12वां टेस्ट था, लेकिन V3 अपग्रेडेड संस्करण की यह पहली उड़ान थी. भारतीय समयानुसार 23 मई की सुबह लॉन्च किए गए इस रॉकेट की कुल ऊंचाई करीब 403 फीट है. इसमें ऊपरी हिस्से को स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट और निचले हिस्से को सुपर हेवी बूस्टर कहा जाता है. दोनों मिलकर पूरी प्रणाली बनाते हैं.
स्पेसएक्स का दावा है कि यह पूरी तरह रीयूजेबल यानी दोबारा इस्तेमाल किए जाने वाला लॉन्च सिस्टम है, जो भविष्य में अंतरिक्ष यात्राओं की लागत को काफी कम कर सकता है.
NASA आने वाले Artemis III मिशन में स्टारशिप को ह्यूमन लैंडिंग सिस्टम (HLS) के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है. इसी स्पेसक्राफ्ट के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है.
NASA के अनुसार, हालिया टेस्ट में हॉट स्टेजिंग, बूस्टर परफॉर्मेंस और ऑर्बिटल ऑपरेशन जैसे कई महत्वपूर्ण तकनीकी लक्ष्य हासिल किए गए हैं. हालांकि इंसानों वाली उड़ान और पूरी रीयूजेबिलिटी की दिशा में अभी और परीक्षण बाकी हैं, लेकिन हर सफल मिशन स्टारशिप को वास्तविक अंतरिक्ष अभियानों के और करीब ले जा रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्टारशिप पूरी तरह सफल होती है, तो यही सिस्टम भविष्य में इंसानों को मंगल ग्रह तक पहुंचाने की सबसे बड़ी उम्मीद बन सकता है.