नई दिल्ली । सर्वपितृ अमावस्या पितृपक्ष का अंतिम दिन होता है। इस दिन पितरों की आत्मा की शांति और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक कर्म किए जाते हैं। इस वर्ष 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या मनाई जाएगी। इस बार शनिवार को अमावस्या पड़ने के कारण इसे शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवसर पर पीपल के पेड़ की पूजा और दान-पुण्य करना विशेष फलदायी माना जाता है।
ज्योतिषीय मान्यताओं में पीपल के पेड़ का संबंध पितरों और शनिदेव की उपासना से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा-पाठ करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-शांति की कामना पूरी होती है। आइए जानते हैं सर्वपितृ अमावस्या पर पीपल से जुड़े कौन-कौन से उपाय किए जाते हैं।
1. पीपल के पेड़ की करें पूजा
सर्वपितृ अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जल में थोड़ा कच्चा दूध और काले तिल मिलाकर पीपल की जड़ में अर्पित किया जा सकता है। इसके बाद घी का दीपक जलाकर पितरों का स्मरण करें और जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
इसके बाद श्रद्धापूर्वक सात परिक्रमा करने की परंपरा भी बताई जाती है। मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
2. शाम को पीपल के नीचे जलाएं दीपक
सर्वपितृ अमावस्या की शाम को पीपल के पेड़ के नीचे दीपदान करना भी धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। परंपरा के अनुसार, इस दिन सरसों के तेल का दीपक जलाकर पितरों और शनिदेव का स्मरण किया जाता है।
कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में आटे से बने सात दीपक जलाने का भी उल्लेख मिलता है। इसे पितरों के प्रति श्रद्धा और शनिदेव की कृपा प्राप्त करने की प्रार्थना से जोड़ा जाता है।
दीपक जलाते समय अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखें और पेड़ की जड़ों या सूखी पत्तियों के पास आग फैलने की आशंका न होने दें।
3. पीपल की जड़ में अर्पित करें जल और करें मंत्र जाप
सर्वपितृ अमावस्या पर पीपल की जड़ में जल, फूल, चावल और चीनी अर्पित करने की परंपरा भी प्रचलित है। इसके बाद पितरों का ध्यान करते हुए इस मंत्र का जाप किया जा सकता है:
ॐ पितृभ्यः नमः।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितरों के सम्मान में मंत्र जाप, पितृसूक्त का पाठ और जरूरतमंदों को भोजन कराना पुण्यकारी माना जाता है। इस दिन पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना और उनकी स्मृति में दान करना भी महत्वपूर्ण परंपरा है।
4. शनिदेव की पूजा और सरसों के तेल का दान
इस वर्ष अमावस्या शनिवार को पड़ने के कारण शनिदेव की पूजा का भी विशेष महत्व बताया जा रहा है। श्रद्धालु शनि मंदिर में जाकर पूजा कर सकते हैं, सरसों के तेल का दान कर सकते हैं और शनि चालीसा का पाठ कर सकते हैं।
ज्योतिषीय मान्यताओं में इन उपायों को शनि दोष के प्रतिकूल प्रभाव कम करने की प्रार्थना से जोड़ा जाता है। हालांकि, इन उपायों से किसी दोष का निश्चित रूप से निवारण होने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
सर्वपितृ अमावस्या पर किन बातों का रखें ध्यान?
- पितरों के नाम पर श्रद्धापूर्वक तर्पण और श्राद्ध करें।
- जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान दें।
- परिवार के बुजुर्गों का सम्मान करें और जरूरतमंद लोगों की सहायता करें।
- पूजा के दौरान स्वच्छता और अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखें।
- धार्मिक अनुष्ठान अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार करें।
सर्वपितृ अमावस्या का मुख्य उद्देश्य अपने पूर्वजों का स्मरण करना, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करना है। पीपल की पूजा, दीपदान और मंत्र जाप जैसी परंपराएं इसी आस्था का हिस्सा हैं।