तिल्दा-नेवरा । जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायपुर के तत्वावधान में बुधवार को केरला पब्लिक स्कूल, तिल्दा में ‘सुरक्षित बचपन’ विषय पर बाल सुरक्षा जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा, बाल शोषण से बचाव और कानूनी सहायता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। वक्ताओं ने बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और किसी भी असुरक्षित परिस्थिति में बिना डर अपनी बात रखने के लिए प्रेरित किया।
अच्छे और बुरे स्पर्श के बीच अंतर समझाया
शिविर के दौरान अतिथियों ने विद्यार्थियों को अच्छे और बुरे स्पर्श के बीच अंतर समझाया। बच्चों को बताया गया कि यदि कोई व्यक्ति उन्हें असहज महसूस कराए या उनके साथ गलत व्यवहार करे, तो उन्हें चुप रहने के बजाय इसकी जानकारी अपने माता-पिता, शिक्षकों या किसी अन्य विश्वसनीय व्यक्ति को देनी चाहिए।
वक्ताओं ने बच्चों को सतर्क रहने, अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देने और किसी भी प्रकार के शोषण के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को अपने साथ होने वाली किसी भी अनुचित घटना के बारे में बताने में संकोच नहीं करना चाहिए।
बाल सुरक्षा परिवार, स्कूल और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना परिवार, विद्यालय और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी है कि उन्हें कम उम्र से ही सुरक्षा, सम्मान और सहायता प्राप्त करने के अधिकार के बारे में जानकारी दी जाए।
विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि किसी परेशानी या खतरे की स्थिति में वे शिक्षकों, अभिभावकों और संबंधित सहायता सेवाओं से संपर्क कर सकते हैं। शिविर का उद्देश्य बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें अपनी सुरक्षा के प्रति सजग बनाना रहा।
न्यायिक एवं शिक्षा विभाग के अधिकारी रहे उपस्थित
शिविर में तिल्दा व्यवहार न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश भावेश कुमार वट्टी, तिल्दा के खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) लीलाधर सिन्हा, लिकेश्वर जाहिरे, बीआरसी टिकेश्वर साहू तथा व्यवहार न्यायालय तिल्दा की अधिकार मित्र नव्या साहू विशेष रूप से उपस्थित रहे।
विद्यालय परिवार की ओर से सभी अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। अतिथियों ने विद्यार्थियों को बाल सुरक्षा से जुड़े विषयों को गंभीरता से समझने और जरूरत पड़ने पर उपलब्ध सहायता लेने की सलाह दी।
सुरक्षित भविष्य के लिए जागरूकता पर जोर
आयोजन के माध्यम से बच्चों को बाल अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा और कानूनी सहायता के महत्व से परिचित कराया गया। वक्ताओं ने कहा कि जागरूकता और सही मार्गदर्शन से बच्चों को असुरक्षित परिस्थितियों की पहचान करने तथा समय रहते सहायता लेने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम में बाल शोषण के विरुद्ध जागरूकता बढ़ाने, बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाने और उनके लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।