RBI का बड़ा फैसला: अब एक ही Account Aggregator से शेयर कर सकेंगे पूरी वित्तीय जानकारी

मुंबई | भारतीय रिजर्व बैंक ने ग्राहकों के लिए वित्तीय जानकारी साझा करने की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। RBI ने NBFC-Account Aggregators (NBFC-AA) के बीच इंटरऑपरेबिलिटी लागू करने का फैसला किया है। यह व्यवस्था ग्राहकों को अलग-अलग Account Aggregators पर अलग से पंजीकरण किए बिना अपनी वित्तीय जानकारी को एक ही प्लेटफॉर्म के जरिए साझा और एकत्र करने की सुविधा देगी।

RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 7 अक्टूबर को मौद्रिक नीति समिति के फैसलों की घोषणा के दौरान इस कदम की जानकारी दी। नई व्यवस्था का उद्देश्य ग्राहकों की सुविधा बढ़ाने के साथ डिजिटल वित्तीय सेवाओं को अधिक सहज और प्रभावी बनाना है।

दिसंबर तक लागू होगी व्यवस्था

RBI के मुताबिक NBFC-Account Aggregators के बीच इंटरऑपरेबिलिटी की व्यवस्था को 31 दिसंबर 2026 तक लागू करने का लक्ष्य है। इसके बाद ग्राहक अपनी पसंद के किसी एक Account Aggregator के जरिए अलग-अलग वित्तीय संस्थानों में उपलब्ध जानकारी को एक्सेस और शेयर कर सकेंगे।

ग्राहक की सहमति से ही साझा होगा डेटा

Account Aggregator व्यवस्था में वित्तीय जानकारी का आदान-प्रदान ग्राहक की स्पष्ट सहमति के आधार पर होता है। Account Aggregator वित्तीय संस्थानों के बीच डेटा ट्रांसफर करने में एक सुरक्षित माध्यम की भूमिका निभाता है। बिना ग्राहक की अनुमति के उसकी वित्तीय जानकारी साझा नहीं की जाती।

इससे बैंक, बीमा कंपनियां, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय संस्थानों से जुड़ी जानकारी को सुरक्षित तरीके से साझा करना आसान हो सकता है। खासकर डिजिटल लोन जैसी सेवाओं में ग्राहक की वित्तीय स्थिति का आकलन तेजी से करने में मदद मिल सकती है।

बैंक जमा की जानकारी भी एक जगह दिखेगी

RBI ने एक अन्य महत्वपूर्ण कदम के तहत SEBI-विनियमित डिपॉजिटरी को NBFC-Account Aggregators के माध्यम से बैंक जमा खातों की जानकारी Consolidated Account Statement (CAS) में शामिल करने की सुविधा देने का फैसला किया है।

इससे डीमैट खाताधारक अपने शेयर, बॉन्ड और अन्य निवेशों के साथ बैंक जमा की जानकारी भी एक ही स्टेटमेंट में देख सकेंगे। दोनों उपायों को दिसंबर 2026 के अंत तक लागू किए जाने की उम्मीद है।

RBI के इस फैसले से ग्राहकों को अपनी वित्तीय जानकारी पर बेहतर नियंत्रण मिलने के साथ-साथ अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर बार-बार प्रक्रिया पूरी करने की जरूरत कम हो सकती है।

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