राजनाथ सिंह और पीट हेगसेथ ने भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी की समीक्षा की, सैन्य तकनीक और संयुक्त उत्पादन पर हुई चर्चा

नई दिल्ली/सेबू । भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को फिलीपींस के सेबू में अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के साथ द्विपक्षीय बैठक की। यह बैठक आसियान रक्षा मंत्रियों की 13वीं बैठक (ADMM-Plus) से इतर हुई। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका के 10 वर्षीय रक्षा सहयोग ढांचे के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की और रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की।

सैन्य तकनीक और संयुक्त उत्पादन पर विशेष जोर

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बैठक की जानकारी देते हुए बताया कि दोनों देशों के बीच सैन्य तकनीक, सूचनाओं के आदान-प्रदान और रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका की मजबूत रक्षा साझेदारी स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है।

रक्षा साझेदारी के एक वर्ष पूरे होने पर चर्चा

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी बैठक को सकारात्मक बताते हुए कहा कि दोनों देशों ने प्रमुख रक्षा साझेदारी के ढांचे के एक वर्ष पूरे होने के अवसर पर सहयोग की प्रगति पर चर्चा की। उन्होंने रक्षा संबंधों को और मजबूत बनाने के नए रास्तों पर विचार करने की बात कही।

भारत और अमेरिका ने 31 अक्टूबर 2025 को मलेशिया के कुआलालंपुर में 10 वर्षीय रक्षा सहयोग ढांचे पर हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को व्यापक बनाना और सैन्य क्षमताओं तथा रक्षा औद्योगिक साझेदारी को आगे बढ़ाना है।

ADMM-Plus बैठक में भारत की भागीदारी

राजनाथ सिंह 28 और 29 अक्टूबर को फिलीपींस के सेबू में आयोजित 13वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। इस मंच पर आसियान सदस्य देशों और उनके आठ संवाद साझेदारों के बीच रक्षा सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता और साझा सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श होता है।

बैठक से इतर राजनाथ सिंह विभिन्न देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी कर रहे हैं। भारत का उद्देश्य आसियान देशों के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत करना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता तथा सहयोग को बढ़ावा देना है।

भारत-अमेरिका की यह वार्ता ऐसे समय हुई है, जब दोनों देश रक्षा तकनीक, सैन्य सूचनाओं के आदान-प्रदान और संयुक्त उत्पादन के क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

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