रायपुर : सुशासन तिहार – संवेदनशील शासन, त्वरित समाधान और जन-विश्वास का नया अध्याय

रायपुर |  छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  श्री विष्णुदेव साय  के नेतृत्व में आयोजित     सुशासन तिहार  अब केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं बल्कि जनता से जुड़ा एक सशक्त जन-आंदोलन बन चुका है। इस पहल ने शासन और नागरिकों के बीच विश्वास की नई कड़ी स्थापित की है।

जनता के द्वार पहुंची सरकार

सुशासन तिहार की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि आम आदमी को दफ्तरों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं रह गई। प्रशासन गांव-गांव जाकर  समाधान शिविर  आयोजित कर रहा है, जहां ग्रामीण, किसान, महिलाएं और युवा सीधे अपने आवेदन प्रस्तुत कर रहे हैं। इन शिविरों में अधिकांश मामलों का  मौके पर ही निपटारा  किया जा रहा है, जो सरकार की अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुँचाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

त्वरित निर्णय और प्रभावी क्रियान्वयन

शिविरों में प्रशासनिक संवेदनशीलता का अनूठा स्वरूप देखा जा रहा है। पेयजल संकट के समाधान हेतु नए हैंडपंपों की स्वीकृति, अतिरिक्त राशन दुकान, सड़क, बिजली और आवास से जुड़े मामले  मौके पर ही हल  किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन को जवाबदेह बनाते हुए अधिकारियों को पारदर्शी कार्यप्रणाली अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।

अंतिम व्यक्ति को मिल रहा सीधा लाभ

सरकार की योजनाओं का केंद्र बिंदु समाज का वंचित वर्ग है। प्रधानमंत्री आवास योजना से हजारों परिवारों को **पक्की छत** मिल रही है। महतारी वंदन योजना के जरिए महिलाओं को आर्थिक सहयोग मिल रहा है। किसानों को **सम्मान निधि, आधुनिक उपकरण और सिंचाई सुविधाएं** उपलब्ध कराई जा रही हैं। शिविरों में **आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, किसान किताब और जॉब कार्ड** का वितरण तत्काल किया जा रहा है।

प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता

मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि **जन-समस्याओं के प्रति लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी**। अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की गई है। कलेक्टर और वरिष्ठ अधिकारी सीधे जनता से संवाद कर समस्याओं का फीडबैक ले रहे हैं, जिससे नागरिकों में शासन के प्रति गहरा भरोसा बढ़ा है।

जनभागीदारी और लोकतंत्र

इस अभियान ने शासन व्यवस्था को अधिक **सहभागी और जन-केंद्रित** बनाया है। जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और ग्रामीणों की उत्साही भागीदारी ने सुशासन तिहार को लोकतंत्र के वास्तविक उत्सव में बदल दिया है। यह पहल केवल शिकायत निवारण तक सीमित नहीं, बल्कि नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक कर विकास की मुख्यधारा में जोड़ रही है।

नए छत्तीसगढ़ की आधारशिला

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सुशासन, पारदर्शिता और जनसेवा **छत्तीसगढ़ की सर्वोच्च प्राथमिकता** बन चुकी है। सुशासन तिहार इसी विजन का मूर्त रूप है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा, “जनता की सेवा ही सर्वोच्च प्राथमिकता है। अब प्रशासन स्वयं आपके द्वार खड़ा है, ताकि आप अपने हक के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटें।”

 

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