रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में प्रस्तावित कोयला खदान को लेकर पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों ने जंगलों की कटाई का विरोध करते हुए पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कोयला खदान के लिए क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हरे-भरे पेड़ों की कटाई की जा रही है। उनका कहना है कि अब तक हजारों पेड़ काटे जा चुके हैं और कटाई का काम लगातार जारी है, जिससे क्षेत्र के पर्यावरण और जैव विविधता पर असर पड़ने की आशंका है।
13,537 पेड़ों की कटाई की मिली अनुमति
मामले में वन विभाग के एसडीओ आशुतोष मांडवा ने बताया कि तमनार ब्लॉक के नागरमुड़ा गांव में प्रस्तावित कोयला खदान के लिए पेड़ों की कटाई की अनुमति मांगी गई थी। इसके बाद विभाग ने 13,537 पेड़ों को काटने की अनुमति प्रदान की है।
उन्होंने बताया कि कटाई के दायरे में साल सहित कई प्रजातियों के छोटे-बड़े पेड़ शामिल हैं। विभाग की अनुमति के तहत ही कार्रवाई की जा रही है।
ग्रामीणों ने जताई पर्यावरण को नुकसान की चिंता
वहीं, स्थानीय ग्रामीणों और क्षेत्र में सक्रिय आरटीआई कार्यकर्ताओं का आरोप है कि अनुमति से अधिक पेड़ों की कटाई की जा रही है। उनका कहना है कि मशीनों के जरिए हरे-भरे पेड़ों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
पेड़ों की कटाई का विरोध करने के लिए नागरमुड़ा गांव के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और अपना विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल क्षेत्र में पेड़ों की कटाई से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ेगा और इसका सीधा असर स्थानीय लोगों के जीवन पर पड़ेगा।
फिलहाल, ग्रामीणों के विरोध के बाद मामला चर्चा में है। वन विभाग और प्रशासन की निगरानी में आगे की कार्रवाई जारी है।