सक्ति- चंद्रपुर की पहचान मां चंद्रहासिनी देवी से है, चंद्रहासिनी देवी का मंदिर शक्ति के सिद्ध पीठ में परिभाषित होता है-
चंद्रपुर की दूसरी पहचान देवी चंद्रहासिनी के अलावा भक्त और बहुआयामी सेवा के आलोक व्यक्तित्व प्रह्लाद राय अग्रवाल से भी है,जिन्हें जिन्हें पूरा अंचल काका जी का आत्मीय संबोधन देता है, चंद्रपुर की मिट्टी काका जी के लिए चंदन माटी है, सन 1852 में आपके पूर्वजों का चंद्रपुर आगमन हुआ था, पैतृक रूप से कृषि व्यापार संचालित होता था, लेकिन एक रेखांकित करने वाली बात यह है कि- प्रह्लाद राय अग्रवाल जी ने उस जमाने में नटवर हाई स्कूल रायगढ़ से मैट्रिक पास किया, शिक्षा का यह उजाला उनके इर्द-गिर्द इस तरह झिलमिलाता रहा कि उन्होंने अपने पूरे अंचल में शिक्षा के लिए अनेक ज्योति संस्थान स्थापित किए, प्रह्लाद राय अग्रवाल अंचल के प्रथम ग्राम्य कृषि वैज्ञानिक हुए, रायगढ़ से शिक्षा पूरी करने के बाद प्रह्लाद राय अग्रवाल चंद्रपुर से लगे डभरा विकासखंड के ग्राम कलमा आ गए, केवल वर्षा आधारित पारंपरिक खेती के स्थान पर प्रह्लाद राय जी ने उन्नत कृषि के उपाय किए, जिससे बारहों महीने फसल मिलने लगी, लोग दूर-दूर से इस उन्नत कृषि को देखने आते थे
तत्कालीन भूतपूर्व विधायक भवानी लाल वर्मा जी तो इसके मुक्त प्रशंसक थे, पूरे मध्यप्रदेश में कलमा की चर्चा होती थी, बिलासपुर संभाग में कई बार कलमा टॉप पर रहा, यह एक शिक्षित, समर्पित और युवा प्रतिभा का कमाल था,जिसने पारंपरिक खेती-किसानी को कृषि विज्ञान की कसौटी पर एक बिल्कुल नई सफलता दिलाई थी
अनन्य भक्ति एवं अनन्य समर्पण
चंद्रहासिनी देवी के आशीर्वाद के साथ प्रह्लाद राय अग्रवाल जी का जीवन चक्र गतिमान था, सन 1995 में चंद्रहंसिनी ट्रस्ट बना, और फिर प्रह्लाद राय जी पूरे समर्पण के साथ मंदिर की अभिनव विकास की ओर अग्रेषित हुए, मंदिर में सीढ़ियां नहीं थी, तत्कालीन कलेक्टर एम के राउत से उनकी चर्चा हुई, और अपेक्षित सहयोग का ठोस आश्वासन भी मिला, मंदिर को नवल एवं भव्य रूप प्रदान करने की दिशा में प्रह्लाद राय जी की यह मुलाकात टर्निंग प्वाइंट बन गई, ना केवल सीढ़ियां बनी, बल्कि धीरे-धीरे मंदिर के भव्य रूप की रूपरेखा भी बन गई
तत्कालीन सांसद परसराम भारद्वाज एवं तत्कालीन विधायक भवानी लाल वर्मा की अनुदान राशि मिली, जनप्रतिनिधियों का जन सहयोग मिला और परिणाम स्वरूप पूरे भारत देश के धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर मां चंद्रहासिनी देवी मंदिर चंद्रपुर पूरी आन- बान और शान के साथ उभरने लगा, उदार,दान, चेतना भक्ति और अध्यात्म ने प्रह्लाद राय जी की दान चेतना का व्यापक विस्तार किया, आपने चंद्रपुर, रायगढ़, छत्तीसगढ़ सहित देश के कई हिस्सों में अपनी दानशीलता को स्थाई रूप प्रदान किया, माताश्री द्वारा प्रदत 82 डिसमिल जमीन पर बने सीताराम मंदिर का निर्माण और देखरेख आज भी जारी है, अग्रसेन भवन में मंदिर के लिए एक कक्ष का निर्माण,बद्रीनाथ,इलाहाबाद एवम अग्रोहा धाम में एक कक्ष का निर्माण, सीतापुर उत्तरप्रदेश के हनुमानगढ़ी धर्मशाला में भी आपने कक्ष का निर्माण करवाया, रायगढ़ अग्रोहा भवन के आप आजीवन सदस्य रहे हैं, गायत्री चेतना केंद्र चंद्रपुर का जन सहयोग में निर्माण करवाया
भगवान अग्रसेन महाराज के समर्पित सेवक प्रह्लाद राय अग्रवाल
यह एक रोचक तथ्य है कि अग्रसेन भवन रायगढ़ से पहले चंद्रपुर में बना, इस उपलब्धि के केंद्र में महाराजा अग्रसेन के प्रति प्रह्लाद रॉय अग्रवाल जी की समर्पित भक्ति चेतना ही रही, इसी अग्रसेन भवन में मंदिर का निर्माण भी कराया है,श्री अग्रवाल जी बेहद शर्मीले और संतोष भरे स्वर में बताते हैं कि मैंने अपने बेटों से जब भी जितनी राशि के लिए कहा सब ने तत्काल राशि समर्पित कि, आपका मानना है कि दान- कर्म की शुरुआत सबसे पहले अपने घर से करनी चाहिए, उजाला शिक्षा के सूरज का प्रह्लाद राय जी शिक्षा के उजाले को अपने अंचल के कोने- कोने में फैलाना चाहते थे, इसलिए आपने अनेक शिक्षा संस्थानों की इमारते रची, अनेक दूसरे शिक्षा संस्थानों से जुड़े और उजाले के दायरे को निरंतर बढ़ाते रहें, सरस्वती शिशु मंदिर के 9 साल अध्यक्ष रहे, संस्था की पढ़ाई व्यवस्था से प्रभावित होकर आपने सांसद एवं जन सहयोग से एक विशाल स्कूल का निर्माण कराया, अपनी पूर्व प्रतिबद्धता के कारण अपने प्रत्येक बेटे से एक-एक लाख रुपये का सहयोग दिलाया,अब दूसरी मंजिल भी तैयार है, 50- 55 लाख के प्रोजेक्ट के इस स्कूल में ही छात्रावास है, इसके पहले 1957- 1958 में ग्राम- चंदली में बेनी बाई पूर्व प्राथमिक शाला आरंभ की, अनेकों स्कूल का आपने उन्नयन किया,माता जी एवं पत्नी के नाम पर कई कक्षों का निर्माण कराया, डभरा कॉलेज के न्यासी प्रेसिडेंट रहे, दरअसल प्रह्लाद राय जी एक व्यक्ति नहीं एक पूरी संस्था है, जैसे एक सूरज की रोशनी से अनेक ग्रह दमकते हैं, ठीक इसी तरह प्रह्लाद राय जी के धार्मिक, सामाजिक, शैक्षणिक सरोकारों से पूरा अंचल दमक रहा है
महानदी की कलकल धारा में निहित होता है-प्रह्लाद राय, मंदिरों की घंटियों से आवाज आती है– प्रह्लाद राय, विद्यालयों की दीवारों से अनुबंधित होता है–प्रह्लाद राय, सेवा संस्थानों से ध्वनित होता है–प्रह्लाद राय, सच कहें तो चंद्रपुर की पहचान है- प्रह्लाद राय-भोजराज पटेल
प्रह्लाद राय अग्रवाल के निधन से चंद्रपुर नहीं अपितु पूरा प्रदेश हतप्रभ है,आज उन्होंने सेवा के लिए जो अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया, वह एक अनूठी मिसाल है, तथा आज प्रह्लाद राय अग्रवाल की प्रेरणा एवं उनके मार्गदर्शन में उनका पूरा परिवार भी सेवा कार्यों में निरंतर समर्पित है,प्रह्लाद राय अग्रवाल जी के सुपुत्र रामअवतार अग्रवाल रामू भैया एवं गोविंद अग्रवाल भी निरंतर सेवा कार्यों में जुटे हुए हैं, शिक्षा का क्षेत्र हो, जनसेवा का क्षेत्र हो, धर्म की बात हो, समाज कल्याण की बात हो, आज मुक्त हस्त से जहां इनका पूरा परिवार सहयोग करते हुए कामों को आगे बढ़ा रहा है, तो वहीं इनके परिवार द्वारा समाज कल्याण एवं राष्ट्र के विकास में दिए जाने वाले योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता