रायपुर । सुकमा वनमंडल के सुकमा वन परिक्षेत्र में मवेशी के मारे जाने के बाद क्षेत्र में बाघ की संभावित मौजूदगी के संकेत मिले हैं। सूचना मिलने पर वन विभाग और पुलिस की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। पशु चिकित्सकों की टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। मौके से बाघ के संभावित पगमार्क मिलने के बाद वन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है।
डीएफओ अक्षय भोंसले के नेतृत्व में वन विभाग की टीमें संभावित आवागमन वाले क्षेत्रों का निरीक्षण कर रही हैं। कोयाबेकुर, नीलावरम, फूलबगड़ी और केरलपाल पंचायत सहित आसपास के वन क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। विभाग राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की निर्धारित SOP के अनुरूप निगरानी और आवश्यक कार्रवाई कर रहा है।
संभावित प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग की टीमें तैनात की गई हैं। ग्रामीणों को सतर्क करने के लिए मुनादी कराई जा रही है और बाघ की गतिविधियों की पुष्टि तथा निगरानी के लिए कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। पुलिस और जिला प्रशासन के सहयोग से क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है।
वन विभाग ने ग्रामीणों से शाम 4 बजे के बाद जंगल में जाने से बचने की अपील की है। आवश्यक होने पर समूह में ही जंगल जाने की सलाह दी गई है। विभाग ने कहा है कि बाघ दिखाई देने पर उसके पास न जाएं, उसका पीछा न करें, भीड़ न लगाएं और उसे भगाने या स्वयं पकड़ने का प्रयास न करें।
विभाग ने ग्रामीणों से बाघ की संभावित गतिविधि अथवा किसी संदिग्ध घटना की सूचना तत्काल वन विभाग को देने की अपील की है। साथ ही अपुष्ट फोटो, वीडियो और सूचनाओं को सोशल मीडिया पर प्रसारित नहीं करने तथा केवल वन विभाग और प्रशासन की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने को कहा गया है।
वन विभाग के अनुसार, यदि जांच में मवेशी की मौत बाघ के हमले से होने की पुष्टि होती है, तो शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार पात्र पशुपालक को उचित मुआवजा दिया जाएगा। विभाग ने ग्रामीणों से घबराने के बजाय सतर्क रहने और अफवाहों से बचने की अपील की है।