डोंगरगढ़ | धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रस्तावित डोंगरगढ़ परिक्रमा पथ परियोजना लगातार विवादों में घिरती जा रही है। निजी भूमि अधिग्रहण, लगभग 55 करोड़ रुपये की लागत, निर्णय प्रक्रिया की पारदर्शिता और सरकारी धन के उपयोग को लेकर किसानों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। मामला अब प्रशासनिक स्तर से आगे बढ़कर हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है, जबकि कांग्रेस ने इसे जनहित का मुद्दा बनाते हुए चक्काजाम आंदोलन किया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी परियोजना का खुलकर विरोध किया है।
किसानों ने उठाए कई सवाल
परियोजना से प्रभावित किसानों का कहना है कि जब परिक्रमा पथ के लिए पर्याप्त शासकीय भूमि उपलब्ध है, तब निजी कृषि भूमि का अधिग्रहण क्यों किया जा रहा है। किसानों ने वैकल्पिक सरकारी मार्ग होने का दावा करते हुए अधिग्रहण प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है।
विवाद के बीच कई अहम सवाल उठ रहे हैं—
- यदि शासकीय भूमि उपलब्ध थी तो निजी भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता क्यों पड़ी?
- यदि तकनीकी कारणों से निजी भूमि का चयन किया गया, तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
- क्या वैकल्पिक मार्गों का स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण कराया गया था?
- यदि पूरी प्रक्रिया नियमानुसार हुई, तो मामला हाईकोर्ट तक क्यों पहुंचा?
हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
भूमि अधिग्रहण और परियोजना की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए मामला हाईकोर्ट में पहुंच चुका है। न्यायालय में इस संबंध में सुनवाई जारी है। हालांकि अभी तक किसी जांच एजेंसी ने परियोजना में भ्रष्टाचार या वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं की है।
राजनीतिक रंग भी गहराया
परियोजना को लेकर कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन और चक्काजाम किया। अब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी परियोजना का विरोध करते हुए किसानों की मांगों का समर्थन किया है। इससे यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बन गया है।
स्वतंत्र जांच की उठी मांग
परियोजना को लेकर लगातार बढ़ते विवाद के बीच स्वतंत्र तकनीकी, प्रशासनिक और वित्तीय ऑडिट की मांग तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि परियोजना के सभी निर्णय जनहित और नियमानुसार लिए गए या नहीं।
यदि जांच में यह सामने आता है कि शासकीय भूमि उपलब्ध होने के बावजूद अनावश्यक रूप से निजी भूमि अधिग्रहित की गई या परियोजना की लागत अनावश्यक रूप से बढ़ाई गई, तो यह सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला बन सकता है। वहीं यदि जांच में पूरी प्रक्रिया सही पाई जाती है, तो प्रशासन पर लगे आरोप स्वतः समाप्त हो जाएंगे।
फिलहाल डोंगरगढ़ परिक्रमा पथ परियोजना केवल सड़क निर्माण का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह पारदर्शिता, जवाबदेही और सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग से जुड़ा एक महत्वपूर्ण जनहित का मुद्दा बन चुकी है।