तिल्दा-नेवरा । ग्राम पंचायत बोइरझिटी में सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया शुरू होने के बाद पंचायत की राजनीति गरमा गई है। 11 अगस्त 2026 को ग्राम पंचायत के 10 पंचों ने निर्धारित प्रपत्र में तिल्दा-नेवरा के विहित प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी के समक्ष अविश्वास प्रस्ताव की सूचना प्रस्तुत की है।
पंचों ने ग्राम पंचायत बोइरझिटी के सरपंच मुकेश सोनवानी, पिता संतूराम सोनवानी के खिलाफ पंचायत के कामकाज में कथित मनमानी और वित्तीय अनियमितताओं समेत कई आरोप लगाए हैं। आवेदन पर पंचायत के 10 पंचों के हस्ताक्षर दर्ज हैं।
पंचायत निधि के उपयोग में मनमानी का आरोप
पंचों का आरोप है कि पंचायत निधि और विकास कार्यों से जुड़े फैसलों में पंचों की सहमति नहीं ली जाती तथा पंचायत की राशि के उपयोग में मनमानी की जाती है। आवेदन में ग्राम सभा की अनुमति के बिना राशि आहरित कर कथित तौर पर निजी उपयोग किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
इसके अलावा पंचों ने मूलभूत एवं 15वें वित्त योजना के तहत राशि आहरित किए जाने के बावजूद संबंधित कार्य नहीं कराए जाने का आरोप लगाया है। पंचों ने इन मामलों की जांच की मांग की है।
पंचों के साथ गलत व्यवहार का भी आरोप
अविश्वास प्रस्ताव के आवेदन में सरपंच पर दादागिरी और मनमानी करने तथा पंचायत के निर्वाचित पंचों के साथ कथित तौर पर गलत व्यवहार करने के आरोप भी लगाए गए हैं। पंचों का कहना है कि उनकी बातों को उचित महत्व नहीं दिया जाता और कई मामलों में उन्हें कथित रूप से गुमराह किया जाता है।

मनरेगा कार्य में निजी काम कराने का आरोप
पंचों ने मनरेगा योजना के तहत आंगनबाड़ी भवन निर्माण कार्य में लगे मजदूरों से कथित तौर पर निजी काम कराए जाने का भी आरोप लगाया है। आवेदन में घर निर्माण जैसे निजी कार्यों में मजदूरों के इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए इसे शासकीय योजना के संभावित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता से जोड़कर जांच की मांग की गई है।
ग्रामीणों की शिकायतों का समाधान नहीं होने का दावा
पंचों के अनुसार, ग्रामीणों की समस्याओं और शिकायतों को पंचायत स्तर पर उठाए जाने के बावजूद उनका उचित समाधान नहीं कराया जाता। इसके चलते ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों के बीच असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
इन आरोपों और पंचायत के कामकाज में कथित अनियमितताओं को आधार बनाते हुए 10 पंचों ने सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। अब मामला विहित प्राधिकारी के समक्ष है। आवेदन की जांच और निर्धारित पंचायत राज प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, पंचों द्वारा सरपंच पर लगाए गए सभी आरोप फिलहाल आरोप मात्र हैं। इनकी पुष्टि जांच और संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।