बेसहारा मवेशियों के लिए बनेगा स्थायी आश्रय, छत्तीसगढ़ में चरणबद्ध तरीके से खुलेंगे गौधाम

रायपुर |  छत्तीसगढ़ सरकार ने घुमंतू और निराश्रित मवेशियों के संरक्षण, गौ-संवर्धन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से ‘गौधाम योजना’ को गति दी है। योजना के तहत प्रदेशभर में कुल 1460 गौधामों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है।

छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग द्वारा घुमंतू एवं बेसहारा पशुधन के बेहतर व्यवस्थापन के लिए गौधाम योजना के अंतर्गत इन गौधामों की स्थापना को मंजूरी दी गई है। योजना के तहत प्रत्येक विकासखंड में उत्कृष्ट 10 गौठानों का चयन कर उन्हें गौधाम के रूप में विकसित किया जाएगा।

151 गौधामों को मिली प्रशासकीय स्वीकृति

योजना के अंतर्गत अब तक प्राप्त 408 आवेदनों में से 151 आवेदनों को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। वहीं 88 गौधामों का पंजीयन पूरा हो चुका है। वर्तमान में प्रदेश में संचालित 42 गौधामों में लगभग 5 हजार 109 निराश्रित पशुओं को संरक्षण दिया जा रहा है।

राष्ट्रीय राजमार्गों के समीप गौठानों को प्राथमिकता

पशुधन विकास विभाग के अनुसार, प्रथम चरण में ऐसे गौठानों का चयन किया गया है जो राष्ट्रीय राजमार्गों के समीप स्थित हैं और जहां आवश्यक अधोसंरचनाएं उपलब्ध हैं।

गौधामों का संचालन स्वयंसेवी संस्थाओं, पंजीकृत गौशालाओं, एनजीओ, एफपीओ और ट्रस्ट के माध्यम से किया जाएगा। हाल ही में नियमों में संशोधन करते हुए ग्राम पंचायतों को भी गौधाम संचालन में प्राथमिकता दी गई है। इसके साथ ही शहरी गौठानों को भी योजना में शामिल किया गया है।

स्वीकृति प्रक्रिया को बनाया गया पारदर्शी

गौधाम स्थापना के लिए सरकार ने चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और सख्त बनाया है। इसके तहत जिला स्तरीय समिति और कलेक्टर की अनुशंसा के बाद ग्राम पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया जाता है।

इसके बाद स्थल का भौतिक सत्यापन कर आवेदन छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को भेजे जाते हैं। आयोग की क्रियान्वयन समिति हर तीन महीने में होने वाली बैठक में आवेदनों की समीक्षा करती है। समीक्षा के बाद प्रस्ताव शासन को भेजे जाते हैं और स्वीकृति मिलने के बाद अनुबंध एवं पंजीयन की प्रक्रिया पूरी की जाती है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

राज्य सरकार का मानना है कि गौवंश ग्रामीण संस्कृति और कृषि व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गौधामों के विस्तार से निराश्रित पशुओं को सुरक्षित आश्रय मिलेगा, वहीं गोबर और गौ-आधारित गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

ग्राम पंचायतों को संचालन में प्राथमिकता और शहरी क्षेत्रों को योजना से जोड़ने के बाद आने वाले समय में गौधामों की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से नए गौधामों की स्थापना के लिए लगातार आवेदन प्राप्त हो रहे हैं, जिन पर कार्रवाई जारी है।

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