नई दिल्ली। दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगे बिजली बिल का सामना करना पड़ सकता है। दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) ने बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को उपभोक्ताओं से 8 प्रतिशत तक अतिरिक्त फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) वसूलने की अनुमति दे दी है।
DERC के इस फैसले के बाद लगातार दूसरे महीने बिजली बिल में FPPAS जुड़ने की संभावना है। अधिकारियों के मुताबिक, बिजली खरीद लागत में बढ़ोतरी की भरपाई के लिए यह अतिरिक्त सरचार्ज लगाया जा रहा है।
तीनों डिस्कॉम को मिली अतिरिक्त सरचार्ज की मंजूरी
DERC ने अलग-अलग बिजली कंपनियों के लिए अलग-अलग दरें तय की हैं। इसके तहत:
- बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL) को 7.94 प्रतिशत अतिरिक्त FPPAS की अनुमति दी गई है।
- बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (BYPL) के लिए 7.43 प्रतिशत अतिरिक्त सरचार्ज मंजूर किया गया है।
- टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPDDL) के लिए 2.21 प्रतिशत अतिरिक्त FPPAS की अनुमति दी गई है।
आयोग के आदेश के अनुसार, यह व्यवस्था अगले आदेश तक मासिक आधार पर लागू रह सकती है।
बिजली कंपनियों ने मांगी थी राहत
दिल्ली की तीनों बिजली वितरण कंपनियों ने जून और जुलाई के लिए अतिरिक्त FPPAS लगाने की अनुमति मांगी थी। कंपनियों का कहना था कि मई महीने में बिजली खरीद की वास्तविक लागत तय आधार लागत से अधिक रही है।
डिस्कॉम ने तर्क दिया कि बढ़ी हुई बिजली खरीद लागत का वित्तीय दबाव कम करने और उपभोक्ताओं को लगातार बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सरचार्ज जरूरी है।
FPPAS की सीमा 10 प्रतिशत तक
DERC के नियमों के मुताबिक, किसी एक बिल चक्र में FPPAS की अधिकतम वसूली सीमा 10 प्रतिशत तक है। इसकी दर हर महीने बिजली खरीद लागत के आधार पर आयोग तय करता है।
FPPAS की गणना उपभोक्ता के फिक्स्ड चार्ज और एनर्जी चार्ज के कुल योग के प्रतिशत के आधार पर की जाती है।
क्या होता है FPPAS?
FPPAS यानी Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge बिजली खरीद की बढ़ी हुई लागत की भरपाई के लिए लगाया जाने वाला अतिरिक्त शुल्क है।
जब कोयला, गैस जैसे ईंधन की कीमत बढ़ती है या बिजली कंपनियों को महंगे दाम पर बाजार से बिजली खरीदनी पड़ती है, तो उस अतिरिक्त खर्च का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं से FPPAS के रूप में लिया जाता है।
यह स्थायी शुल्क नहीं होता, बल्कि बिजली खरीद लागत में बदलाव के अनुसार DERC इसकी समीक्षा कर हर महीने दर तय करता है।