नई दिल्ली | तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहे वर्चस्व की जंग अब चुनाव आयोग तक पहुंच चुकी है। आयोग ने पार्टी के पुराने नाम और ‘दो फूल और घास’ चुनाव चिह्न को फिलहाल फ्रीज करते हुए दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और अस्थायी चुनाव चिह्न अलॉट कर दिए हैं। आगामी उपचुनाव के लिए ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ और बागी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया गया है।
मुख्य बातें:
-
नए नाम और अस्थायी चुनाव चिह्न: चुनाव आयोग की अंतरिम व्यवस्था के तहत ममता बनर्जी के गुट को ‘फुटबॉल खेलता खिलाड़ी’ और ऋतब्रत बनर्जी-अरूप रॉय (बागी) गुट को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न मिला है। ये सिंबल फिलहाल केवल आगामी उपचुनाव के लिए ही मान्य होंगे।
-
विवाद की वजह: ऋतब्रत गुट का तर्क है कि नेशनल वर्किंग कमेटी का कार्यकाल फरवरी 2025 में खत्म हो चुका है, इसलिए ममता गुट का ढांचा अवैध है। वहीं, ममता खेमे ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए बागी गुट की प्रक्रिया को असंवैधानिक बताया है।
-
उपचुनाव में आमने-सामने: पश्चिम बंगाल की रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव (मतदान 6 अक्टूबर, परिणाम 9 अक्टूबर) के लिए दोनों गुटों ने अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं।
-
रेजीनगर सीट: ममता गुट से रबीउल आलम चौधरी और बागी गुट से सफिउज्जमान शेख मैदान में हैं।
-
नंदीग्राम सीट: ममता गुट से संचिता प्रधान और ऋतब्रत गुट से एहतेशमुल हक उम्मीदवार बनाए गए हैं।
-
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि दोनों गुटों के उम्मीदवारों के नामांकन लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के नियमों और वैधानिक शर्तों को पूरा करने के अधीन ही मान्य होंगे।