जन्माष्टमी पर बड़ा ऐलान: ग्लोबल होगी ‘कृष्णावतारम’ ट्रिलॉजी, 4 भाषाओं में दुनिया भर में रिलीज की तैयारी

नई दिल्ली। जन्माष्टमी के अवसर पर भारतीय सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी बड़ी पहल सामने आई है। आर्ट ऑफ लिविंग के वर्ल्ड फोरम फॉर आर्ट एंड कल्चर (WFAC) और निर्माता डॉ. साजन राज कुरुप के क्रिएटिवलैंड स्टूडियोज ने ‘कृष्णावतारम’ ट्रिलॉजी को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए साझेदारी की है। इस संबंध में गुरुदेव श्री श्री रविशंकर की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।

ट्रिलॉजी की पहली फिल्म ‘कृष्णावतारम: पार्ट 1 – हृदयम’ भगवान कृष्ण की जीवन लीला और उनके दिव्य सफर पर आधारित है। भारत में रिलीज के बाद फिल्म को दर्शकों की प्रतिक्रिया मिली है। अब इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय प्रवासियों के साथ-साथ विदेशी दर्शकों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।

चार भाषाओं में होगी अंतरराष्ट्रीय रिलीज

फिल्म को हिंदी, तमिल, तेलुगु और अंग्रेजी भाषाओं में वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने की योजना है। निर्माताओं का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल फिल्म को विदेशों में रिलीज करना नहीं, बल्कि भगवान कृष्ण की कथा के माध्यम से भारतीय कला और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच प्रदान करना है।

इस प्रोजेक्ट को सिनेमा तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसके तहत सीरीज, संगीत, लाइव एक्सपीरियंस, गेम्स, एजुकेशन और इमर्सिव कल्चरल एक्सपीरियंस जैसे माध्यमों को भी विकसित करने की योजना है।

श्री श्री रविशंकर का मिला मार्गदर्शन

फिल्म को आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर का समर्थन और मार्गदर्शन मिला है। साझेदारी के दौरान उन्होंने कृष्ण की आध्यात्मिक अवधारणा और उनके जीवन संदेश को दुनिया तक पहुंचाने के महत्व पर बात की।

निर्माता डॉ. साजन राज कुरुप ने कहा कि गुरुदेव का आशीर्वाद इस प्रोजेक्ट के लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने बताया कि ‘कृष्णावतारम’ के जरिए भारतीय संस्कृति और सांस्कृतिक मान्यताओं को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

ग्लोबल कल्चरल मूवमेंट बनाने का विजन

निर्माताओं के अनुसार ‘कृष्णावतारम’ को केवल एक फिल्म के रूप में नहीं, बल्कि सिनेमा, कला और भारतीय विरासत से जुड़े वैश्विक सांस्कृतिक अभियान के रूप में विकसित करने का विजन है। वहीं WFAC के माध्यम से दुनिया भर के कलाकारों और कला प्रेमियों को इस पहल से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

‘हृदयम’ से शुरू होने वाला यह सफर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संस्कृति और भगवान कृष्ण की कथा को आधुनिक माध्यमों से नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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