विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर कुब्रा सैत की अपील, बोलीं—मानसिक परेशानियों पर खुलकर करें बात

मुंबई । विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर अभिनेत्री कुब्रा सैत ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर खुलकर बातचीत करने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की सहायता लेने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मानसिक परेशानियों से जूझ रहे लोगों को यह समझना चाहिए कि वे अकेले नहीं हैं और अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में संकोच नहीं करना चाहिए।

कुब्रा सैत ने अपने निजी अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब वह चौथी कक्षा में पढ़ती थीं और उनकी उम्र करीब आठ से नौ वर्ष थी, तब कई बार उनका किसी से बात करने का मन नहीं करता था। ऐसे समय में वह अकेले लेटकर सोना पसंद करती थीं।

अभिनेत्री के अनुसार, बचपन के इन अनुभवों को आज पीछे मुड़कर देखने पर मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक स्थिति को समझने के महत्व का एहसास होता है। उनके अनुभव इस बात की ओर ध्यान दिलाते हैं कि बच्चों की भावनाओं को समझना और उन्हें अपनी बात कहने के लिए सुरक्षित माहौल देना जरूरी है।

मानसिक स्वास्थ्य पर बातचीत जरूरी

कुब्रा सैत ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों को छिपाने के बजाय उन पर खुलकर बात करने की जरूरत बताई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मानसिक तनाव या भावनात्मक कठिनाइयों से गुजर रहे लोगों को अपने अनुभव साझा करने चाहिए और जरूरत पड़ने पर योग्य विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए।

अक्सर लोग मानसिक परेशानियों के बारे में बात करने से हिचकिचाते हैं। ऐसे में परिवार, दोस्तों और समाज का सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। संवेदनशीलता के साथ किसी की बात सुनना और बिना किसी पूर्वाग्रह के उसका साथ देना मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मददगार है।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस का संदेश

हर साल 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना और जरूरतमंद लोगों तक सहायता की जानकारी पहुंचाना है।

कुब्रा सैत का संदेश भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण है कि मानसिक स्वास्थ्य पर बातचीत को सामान्य बनाया जाए। मानसिक परेशानियों का सामना करने वाले लोगों को यह महसूस होना चाहिए कि उनकी भावनाएं महत्वपूर्ण हैं और सहायता मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी देखभाल की दिशा में एक जरूरी कदम है।

मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जरूरी है कि घर, स्कूल और कार्यस्थलों पर ऐसा वातावरण बनाया जाए, जहां लोग बिना डर और झिझक के अपनी परेशानियां साझा कर सकें।

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