रायपुर/सूरजपुर। विकसित भारत जी-राम-जी योजना के तहत जल संरक्षण कार्यों ने सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड के ग्राम पंचायत कालामांजल की तस्वीर बदल दी है। कभी गर्मी के दिनों में पानी की गंभीर समस्या से जूझने वाला यह वनांचल गांव अब सालभर जल उपलब्धता की ओर बढ़ रहा है।
गांव में कंटूर ट्रेंच और गेबियन चेक डैम जैसी जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण से बारिश के पानी को रोकने और भूजल स्तर बढ़ाने में मदद मिली है। इससे न केवल जल स्रोतों का संरक्षण हुआ, बल्कि मिट्टी के कटाव पर भी नियंत्रण हुआ है।
ग्रामीणों के अनुसार, पहले गर्मी के मौसम में पेयजल, मवेशियों के लिए पानी और खेती-किसानी के लिए काफी परेशानी होती थी। बारिश के बाद पानी तेजी से बह जाता था और कुछ महीनों में जल स्रोत सूखने लगते थे। अब जल संरचनाओं के कारण पानी की उपलब्धता बनी रहने लगी है।
ग्रामवासी मनोहर सिंह ने बताया कि पहले पानी की तलाश सबसे बड़ी चुनौती थी, लेकिन अब जल स्रोत पूरे वर्ष उपयोग में आ रहे हैं। ग्रामीण इसका उपयोग पेयजल, घरेलू कार्यों, मवेशियों और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों में कर रहे हैं।
ग्राम पंचायत सरपंच अर्जुन सिंह ने बताया कि योजना के तहत हुए निर्माण कार्यों से जल संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिला। करीब 250 से अधिक श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध हुआ, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली।
जल संरक्षण कार्यों से गांव में खेती की संभावनाएं बढ़ी हैं और ग्रामीणों को अतिरिक्त आजीविका के नए अवसर भी मिलने लगे हैं। राज्य सरकार और जिला प्रशासन का मानना है कि जनभागीदारी से किए गए ऐसे प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों के सतत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
कालामांजल की सफलता अब अन्य वनांचल क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन रही है, जहां जल संरक्षण के माध्यम से ग्रामीण जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।