रायपुर । छत्तीसगढ़ में टीबी उन्मूलन अभियान को जनभागीदारी के माध्यम से और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को खड़गंवा में ‘जोश टीम’ का राज्य स्तरीय शुभारंभ किया गया। इसके साथ ही प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए। राष्ट्रीय स्तर पर शुरू की जा रही इस पहल के तहत माय भारत के युवा स्वयंसेवकों और एनसीसी कैडेटों को टीबी उन्मूलन अभियान से जोड़ा जा रहा है।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार चार विकासखण्डों—खड़गंवा, सोनहत, बतौली और घरघोड़ा—को टीबी मुक्त विकासखण्ड घोषित किया। यह उपलब्धि राज्य के साथ देश में भी टीबी उन्मूलन के प्रयासों के लिए प्रेरणादायक मानी जा रही है। कार्यक्रम में वर्ष 2025 के लिए प्रदेश की 4,676 टीबी मुक्त पंचायतों को जिला स्तर पर सम्मानित भी किया गया।
स्वास्थ्य मंत्री बोले- टीबी उन्मूलन सामूहिक जिम्मेदारी
कार्यक्रम में उपस्थित स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग का सामूहिक दायित्व है। युवाओं की ऊर्जा और जनभागीदारी को अभियान से जोड़कर टीबी उन्मूलन के प्रयासों को नई गति दी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि समय पर जांच, नियमित उपचार और उपचार का पूरा होना टीबी उन्मूलन के लिए बेहद जरूरी है। इसके साथ ही बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और टीबी मरीजों के साथ होने वाले सामाजिक भेदभाव को समाप्त करना भी आवश्यक है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि ‘जोश टीम’ के माध्यम से माय भारत और एनसीसी से जुड़े युवा अपने क्षेत्रों में लोगों को टीबी के लक्षणों, जांच, उपचार और बचाव के प्रति जागरूक करेंगे। इससे टीबी उन्मूलन का संदेश गांव-गांव और जन-जन तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
चार विकासखण्डों की उपलब्धि बनी प्रेरणा
संचालक स्वास्थ्य सेवाएं ने चार विकासखण्डों को टीबी मुक्त घोषित किए जाने को राज्य के टीबी उन्मूलन अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, स्वास्थ्यकर्मियों, मितानिनों, निक्षय मित्रों, स्वयंसेवी संगठनों और समुदाय के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि अब इस उपलब्धि को बनाए रखने के साथ ही प्रदेश के अन्य विकासखण्डों को भी टीबी मुक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता है। इसके लिए संभावित टीबी मरीजों की समय पर पहचान और जांच, गुणवत्तापूर्ण उपचार की उपलब्धता तथा उपचार का पूरा होना प्राथमिकता में शामिल होना चाहिए।
उन्होंने टीबी मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार और सामाजिक सहयोग सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
टीबी उन्मूलन में युवाओं की होगी अहम भूमिका
कार्यक्रम के दौरान माय भारत एवं एनसीसी के जिला अधिकारियों और युवा स्वयंसेवकों से टीबी उन्मूलन अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया गया। युवाओं के माध्यम से समुदाय के लोगों को टीबी के लक्षण पहचानने, समय पर जांच कराने तथा नियमित और पूर्ण उपचार लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, स्वास्थ्यकर्मियों और युवाओं ने टीबी मुक्त छत्तीसगढ़ के संकल्प को मजबूत करने की बात कही। ‘जोश टीम’ के माध्यम से युवाओं की भागीदारी बढ़ाकर प्रदेश में टीबी के प्रति जागरूकता फैलाने, मरीजों को सामाजिक सहयोग देने और टीबी उन्मूलन के प्रयासों को गति देने पर जोर दिया गया।
प्रदेश में चार विकासखण्डों को टीबी मुक्त घोषित किया जाना और हजारों पंचायतों का सम्मान इस दिशा में सामूहिक प्रयासों की अहमियत को रेखांकित करता है। अब लक्ष्य इन उपलब्धियों को बनाए रखते हुए छत्तीसगढ़ को टीबी मुक्त बनाने के अभियान को और व्यापक बनाना है।