नई दिल्ली/तेल अवीव । इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए पिछले 48 घंटे बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुए हैं। अमेरिका की ओर से लिए गए कई फैसलों और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने इजराइल की कूटनीतिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ईरान डील से इजराइल बाहर
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका द्वारा ईरान के साथ संभावित समझौते की प्रक्रिया में इजराइल की प्रमुख शर्तों को शामिल नहीं किया गया। इजराइल चाहता था कि लंबी दूरी की मिसाइलों और क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों को भी समझौते में जोड़ा जाए, लेकिन अमेरिका ने इस पर सहमति नहीं दी।
लगातार 4 बड़े झटके
पिछले 48 घंटों में इजराइल को चार बड़े कूटनीतिक झटके माने जा रहे हैं—
- ईरान समझौते में इजराइल की शर्तों को शामिल नहीं किया गया।
- समझौते से जुड़े एमओयू की कॉपी इजराइल को देने से अमेरिका ने इनकार कर दिया।
- व्हाइट हाउस ने नेतन्याहू को फिलहाल मुलाकात का समय नहीं दिया।
- इजराइल के रक्षा मंत्री बेन ग्वीर को अमेरिका ने वीजा देने से इनकार कर दिया।
ट्रंप के बयान से बढ़ी सियासी गर्मी
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में इजराइल की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए इसे कमजोर राष्ट्र तक बताया और यह भी कहा कि उनके बिना इजराइल मुश्किल में पड़ सकता था। इन बयानों ने इजराइल की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
क्षेत्रीय समीकरण भी बदले
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान मुद्दे पर खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, यूएई, कतर और कुवैत का रुख समझौते के पक्ष में है, जबकि इजराइल इससे असहमत रहा है। तुर्की ने भी कूटनीतिक समाधान की वकालत की है।
चुनावी असर की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी इजराइली चुनावों से पहले यह घटनाक्रम नेतन्याहू के लिए राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, खासकर तब जब अमेरिका के साथ रिश्तों में तनाव बढ़ रहा हो।