रायपुर। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर योग को स्वस्थ जीवनशैली और विकसित भारत के निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताया गया है। भारत की प्राचीन योग परंपरा आज पूरी दुनिया में स्वास्थ्य, संतुलन और कल्याण का संदेश दे रही है। इस वर्ष योग दिवस की थीम “योग फॉर हेल्दी एजिंग” (स्वस्थ एवं सक्रिय वृद्धावस्था के लिए योग) रखी गई है, जिसका उद्देश्य जीवन के हर चरण में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है।
विशेष लेख में उप संचालक, जनसंपर्क डॉ. दानेश्वरी सम्भाकर ने बताया कि योग भारतीय संस्कृति और जीवन पद्धति का अभिन्न हिस्सा रहा है। ऋषि-मुनियों ने योग के माध्यम से स्वस्थ शरीर, शांत मन और आध्यात्मिक चेतना का मार्ग दिखाया। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दी थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने योग को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। उनका मानना है कि योग केवल व्यायाम नहीं बल्कि व्यक्ति, समाज और प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाली जीवन पद्धति है। योग स्वस्थ नागरिकों के माध्यम से मजबूत समाज और राष्ट्र निर्माण का माध्यम बन सकता है।
इस वर्ष राष्ट्रीय स्तर का मुख्य आयोजन कोलकाता में आयोजित किया जाएगा, जहां प्रधानमंत्री स्वयं योगाभ्यास का नेतृत्व करेंगे। वहीं छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य स्तरीय कार्यक्रम अंबिकापुर में आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगाभ्यास में शामिल होकर प्रदेशवासियों को नियमित योग अपनाने का संदेश देंगे।
राज्य सरकार ने योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विभिन्न विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, पंचायतों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से व्यापक कार्यक्रमों की तैयारी की है। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में भी योग की गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव और अनियमित जीवनशैली के बीच योग एक सरल और प्रभावी उपाय है। नियमित योगाभ्यास शरीर को स्वस्थ रखने के साथ मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करता है।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 लोगों को यह संदेश देता है कि योग को केवल एक दिन तक सीमित न रखकर इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाए, ताकि स्वस्थ छत्तीसगढ़, विकसित भारत और बेहतर विश्व के निर्माण में योगदान दिया जा सके।