नई दिल्ली | वैश्विक अनिश्चितताओं, ऊंचे कच्चे तेल के दामों और अमेरिकी टैरिफ दबाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत की रियल GDP ग्रोथ 7.7% रही, जो फरवरी में अनुमानित 7.6% से बेहतर है।
मार्च 2026 में समाप्त चौथी तिमाही (Q4) में GDP वृद्धि दर 7.8% दर्ज की गई। पिछली तिमाही के 8% के मुकाबले यह थोड़ी कम है, लेकिन उम्मीदों से बेहतर परिणाम भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।
विभिन्न सेक्टरों ने बढ़ाया सहयोग
- प्राइमरी सेक्टर (कृषि और मछली पालन) में 3.2% की ग्रोथ हुई।
- सेकेंड्री सेक्टर में 8.8% और टर्शियरी सेक्टर में 9.3% की वृद्धि दर्ज की गई।
- मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशन, ब्रॉडकास्टिंग और स्टोरेज सेवाओं में दोहरे अंकों की ग्रोथ देखी गई।
- फाइनेंशियल, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सेवाओं में भी मजबूत प्रदर्शन रहा।
आर्थिक आंकड़े
- FY26 में रियल GDP 323.12 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जबकि FY25 में यह 299.89 लाख करोड़ रुपये थी।
- नॉमिनल GDP 346.36 लाख करोड़ रुपये रही, जो पिछले वर्ष के 318.07 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
- प्राइवेट फाइनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PFCE) और ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (GFCF) में 7.5% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।
नई बेस ईयर
MoSPI ने इस साल नए बेस ईयर 2022-23 के आधार पर GDP अनुमान जारी किए हैं। मंत्रालय का कहना है कि चौथी तिमाही में 7.8% की यह वृद्धि औद्योगिक उत्पादन, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के लिए सकारात्मक संकेत है।
यह आंकड़ा दिखाता है कि वैश्विक चुनौतियों और आर्थिक दबावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से बढ़ रही है।