पाकिस्तान को बड़ा झटका! भारत बनाएगा चेनाब-ब्यास लिंक टनल

भारत | पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौता स्थगित करने के बाद भारत अब इंडस वाटर सिस्टम के पानी के इस्तेमाल को लेकर बड़े कदम उठाने जा रहा है। केंद्र सरकार ने 2620 करोड़ रुपये की दो अहम परियोजनाओं का प्रस्ताव तैयार किया है, जिनका मकसद सिंधु नदी तंत्र के पानी को भारत के भीतर ज्यादा से ज्यादा उपयोग में लाना है।

इन परियोजनाओं को लेकर बीजेपी नेताओं ने इसे पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका बताया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि यह पाकिस्तान के “जख्मों पर नमक छिड़कने” जैसा कदम है। वहीं हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का कहना है कि इन प्रोजेक्ट्स से पूरे उत्तर भारत को फायदा मिलेगा और भारत का पानी पाकिस्तान जाने के बजाय देश के राज्यों में इस्तेमाल हो सकेगा।

क्या हैं दोनों बड़े प्रोजेक्ट?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार ने चेनाब नदी से जुड़ी दो प्रमुख परियोजनाओं का प्रस्ताव रखा है।

पहली परियोजना हिमाचल प्रदेश में बनने वाली 2352 करोड़ रुपये की “चेनाब-ब्यास लिंक टनल” है। दूसरी जम्मू-कश्मीर के सलाल बांध पर 268 करोड़ रुपये की “सेडिमेंट बाईपास टनल” परियोजना है।

बताया जा रहा है कि चेनाब-ब्यास लिंक टनल प्रोजेक्ट को जल्द ही केंद्र सरकार की मंजूरी मिल सकती है।

चेनाब-ब्यास लिंक टनल से क्या होगा?

इस परियोजना के तहत करीब 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जाएगी, जिसके जरिए चेनाब बेसिन के अतिरिक्त पानी को हिमाचल की ब्यास नदी की ओर मोड़ा जाएगा।

चेनाब नदी हिमाचल प्रदेश की चंद्रा और भागा नदियों के संगम से बनती है, जबकि ब्यास नदी हिमाचल से निकलकर पंजाब में सतलुज से मिलती है। नए प्रोजेक्ट में चेनाब की सहायक नदी चंद्रा के पानी को सुरंगों और हाइड्रोलिक ढांचे के जरिए ब्यास बेसिन की ओर भेजा जाएगा।

सरकार का दावा है कि इससे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान को पानी का सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही हिमाचल प्रदेश में करीब 4000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन की संभावना भी बनेगी।

पहलगाम हमले के बाद बदला भारत का रुख

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौता स्थगित कर दिया था। इसके बाद भारत ने संकेत दिए थे कि अब सिंधु नदी तंत्र के पानी का अधिकतम इस्तेमाल देश के भीतर किया जाएगा।

सरकार की नई परियोजनाओं को उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में भारत सिंधु जल के प्रबंधन और उपयोग को लेकर और भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ला सकता है।

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